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Oct 14, 2026 10:47 pm
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सोनिया गांधी की किताब पर विवाद : अशोक गहलोत का केंद्र पर तीखा हमला, कहा—दबाव में पेंग्विन ने की बहानेबाजी, 10 नवंबर को ही लॉन्च होगी किताब

khaskhabar.com: शनिवार, 05 सितम्बर 2026 09:01 AM (IST)
सोनिया गांधी की किताब पर विवाद : अशोक गहलोत का केंद्र पर तीखा हमला, कहा—दबाव में पेंग्विन ने की बहानेबाजी, 10 नवंबर को ही लॉन्च होगी किताब
जयपुर। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के संस्मरण (मेमॉयर) 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' (Belonging: A Journey of Love) के प्रकाशन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को प्रकाशक पेंग्विन इंडिया के पीछे हटने को लेकर सीधे तौर पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को कठघरे में खड़ा किया। गहलोत ने दो टूक कहा कि प्रकाशक की आनाकानी और बहानेबाजी के पीछे सत्ता का खौफ है, लेकिन दुनिया की कोई भी ताकत इस सच को सामने आने से नहीं रोक सकती। उन्होंने विश्वास जताया कि तय तारीख यानी 10 नवंबर 2026 को ही यह पुस्तक दुनिया के सामने आएगी। 'दुनिया में छप सकती है तो भारत में क्यों नहीं? पेंग्विन की खुली पोल' अशोक गहलोत ने प्रकाशक की भूमिका और कथित सरकारी हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए कहा:
वैश्विक और भारतीय संस्करण में दोहरा रवैया: गहलोत ने कहा कि पेंग्विन की मूल अंतरराष्ट्रीय संस्था (अल्फ्रेड ए नॉफ/पेंग्विन रैंडम हाउस) इस किताब को मूल स्वरूप में पूरे विश्व में प्रकाशित करने को तैयार है। जब दुनिया भर के पाठक इसे पढ़ सकते हैं, तो भारत के पाठकों से इसे क्यों छिपाया जा रहा है? इस विरोधाभास ने पेंग्विन इंडिया की पूरी पोल खोलकर रख दी है।
सत्ता की चुप्पी सहमति का संकेत: पूर्व मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि पीएमओ और सरकार पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और चीन से जुड़े अंशों को हटाने का दबाव बना रहे थे। इसके बावजूद सरकार की ओर से एक शब्द का भी खंडन न आना यह साबित करता है कि मौन रहकर इन आरोपों को स्वीकार कर लिया गया है।
सोनिया गांधी का लंबा सियासी कद और प्रकाशकों की कतार
सोनिया गांधी की राजनीतिक विरासत का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि वे कोई सामान्य हस्ती नहीं हैं:
22 साल तक कांग्रेस की कमान: वे देश की नेता प्रतिपक्ष रही हैं और 22 वर्षों से अधिक समय तक कांग्रेस की अध्यक्ष रहकर उन्होंने भारतीय राजनीति को दिशा दी है। उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और अनुभवों को सेंसर करने का प्रयास अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।
बड़े प्रकाशकों के प्रस्ताव: गहलोत ने खुलासा किया कि जैसे ही यह बात सार्वजनिक हुई कि पेंग्विन इंडिया ने पांडुलिपि छापने से हाथ पीछे खींच लिए हैं, देश-दुनिया के कई प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थानों ने इसे छापने के लिए हाथ आगे बढ़ा दिए हैं।
10 नवंबर को ही होगी रिलीज: गहलोत ने पूर्ण विश्वास जताया कि नया प्रकाशक सामने आएगा, किताब अपने तय मानकों के साथ छपेगी और घोषित तिथि 10 नवंबर को ही इसका विमोचन संपन्न होगा।

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