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राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलनः हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने सांझा किए संसदीय अनुभव

तीसरे संकल्प में विधायी संस्थाओं की दक्षता में अपेक्षित सुधार के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी के अधिक से अधिक उपयोग पर बल दिया गया। इसमें कहा गया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यवाही को जनता के बीच उचित रूप से ले जाना चाहिए। इससे विधायी संस्थाओं की दक्षता में सुधार के साथ-साथ इन संस्थाओं के प्रति जन-विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
चौथा संकल्प युवाओं और महिलाओं की सहभागिता को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित रहा। इसमें कहा गया कि हमारे देश की जनसंख्या का एक बड़ा भाग युवाओं और महिलाओं का है। इसलिए लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनकी और अधिक भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए विधायी संस्थाएं आवश्यक प्रयास करें।
इससे पूर्व हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने सम्मेलन में कहा कि विधानमंडल केवल ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं बल्कि लोकतंत्र के मंदिर हैं, जहां जनता की सामूहिक आवाज़ गूंजती है। उन्होंने सम्मेलन के विषय ‘विधानसभाओं में बहस एवं विचार-विमर्श: जनता का विश्वास निर्माण और जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति’ पर अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि बहस और विचार-विमर्श केवल प्रक्रियाएं नहीं बल्कि लोकतंत्र की आत्मा हैं।
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