Advertisement
पंजाब के बिजली संकट के लिए कोयला आपूर्ति जिम्मेदार नहीं, पर्याप्त भंडार उपलब्ध: कोयला मंत्रालय

मंत्रालय के अनुसार, पचवारा सेंट्रल कोल माइंस से पंजाब की निजी बिजली परियोजनाओं को कोयला आपूर्ति की अनुमति दी गई है, बशर्ते झारखंड सरकार को देय वैधानिक भुगतानों का पालन किया जाए।
इस खदान से निकाला गया कोयला केवल पीएसपीसीएल की इकाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (मानसा) जैसी परियोजनाएं भी इसका उपयोग कर सकती हैं। निर्धारित अंतिम उपयोग संयंत्रों की आवश्यकता पूरी होने के बाद खदान के वार्षिक उत्पादन का 50 प्रतिशत तक इन संयंत्रों को उपलब्ध कराया जा सकता है।
मंत्रालय ने कहा कि पंजाब के आईपीपी को सीआईएल की ओर से पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले तीन दिनों में नाभा पावर की औसत खपत लगभग 4.3 रेक प्रतिदिन रही, जबकि उसे औसतन 5 रेक प्रतिदिन की आपूर्ति की गई। इसी तरह तलवंडी साबो पावर की औसत खपत लगभग 3.8 रेक प्रतिदिन थी, जबकि उसे भी औसतन 5 रेक प्रतिदिन कोयला उपलब्ध कराया गया।
सितंबर 2026 में अब तक नाभा पावर को औसतन 4.9 रेक प्रतिदिन और तलवंडी साबो पावर को 4.1 रेक प्रतिदिन कोयला आपूर्ति की गई है, जो उनकी औसत खपत से अधिक है। इससे यह संकेत मिलता है कि आपूर्ति पक्ष में कोई कमी नहीं है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि अप्रैल 2026 से 11 सितंबर 2026 तक पचवारा खदान का उत्पादन वार्षिक लक्ष्य के 83.67 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जबकि कोयला प्रेषण (डिस्पैच) लक्ष्य के 68.44 प्रतिशत स्तर पर रहा है।
इसके अलावा 11 सितंबर तक पीएसपीसीएल के बिजलीघरों में उपलब्ध कोयला भंडार निर्धारित मानक आवश्यकता के लगभग 114 प्रतिशत के बराबर था। मंत्रालय का कहना है कि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि राज्य में कोयले की पर्याप्त उपलब्धता है और मौजूदा बिजली संकट का कारण कोयला आपूर्ति की कमी नहीं है।
--आईएएनएस
ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे
Advertisement
चंडीगढ़
Advertisement
पंजाब से
सर्वाधिक पढ़ी गई
Advertisement
Traffic
Features


