Chambal River Front: If only AEN of UIT earned so much money then what would the big people have done-m.khaskhabar.com
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चंबल रिवर फ्रंट : यूआईटी के एईएन ने ही इतना माल कमाया तो बड़े लोगों ने क्या किया होगा

khaskhabar.com : गुरुवार, 30 नवम्बर 2023 7:46 PM (IST)
चंबल रिवर फ्रंट : यूआईटी के एईएन ने ही इतना माल कमाया तो बड़े लोगों ने क्या किया होगा
जयपुर/कोटा। चंबल रिवर फ्रंट को लेकर लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे। भाजपा के पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने खुलकर कहा था कि यह कांग्रेस के भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना है। कोटा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीपी) ने यूआईटी के एईएन कमल मीणा की आय से अधिक संपत्ति की जांच में इस बात की पुष्टि कर दी है।
एसीबी के मुताबिक मीणा के पास 29 प्रॉपर्टी के दस्तावेज, लॉकर से 37 तोला सोना, डेढ़ किलो चांदी और नकदी मिली है। इसके बाद कोटा समेत पूरे प्रदेश में अब यह चर्चा होने लगी है कि करीब 1500 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में जब एईएन स्तर के अधिकारी ने इतना माल कमाया है तो इससे जुड़े अन्य बड़े लोग यानि मंत्री और आर्किटेक्ट समेत बाकी लोगों ने कितना कमाया होगा। गुंजल तो यहां तक आरोप लगा चुके हैं कि नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने अपने बेटे के लिए आगे तक की कमाई का इंतजाम कर लिया है।
खास बात यह है कि इंजीनियर 4 साल से अधिक समय तक प्रतिनियुक्ति पर नहीं रह सकते हैं। वह इंजीनियर 13 साल तक आखिर कैसे यहां इस पद पर टिके रहे। ऐसा तत्कालीन स्थानीय निकाय मंत्री शांति धारीवाल की सहमति के बिना नहीं हो सकता है। एसीबी की जांच के दायरे में आने के बाद धारीवाल फिर कटघरे में हैं।
एसीबी की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उसके मुताबिक कमल मीणा राजस्थान विपणन बोर्ड में एईएन हैं, लेकिन 13 सालों से वे कोटा यूआईटी में पदस्थापित हैं। उनके पास एक्सईएन का भी चार्ज है। यही नहीं यूआईटी के चंबल रिवर फ्रंट सहित 1000 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स का जिम्मा रहा है। इनसे पहले भी यूआईटी की आवासीय योजनाओं व अन्य प्रमुख प्रोजेक्ट रहे हैं। ऐसा कैबिनेट मंत्री धारीवाल की सहमति के बिना नहीं हो सकता। कमल मीणा का यूआईटी के कार्यों में खासी दखल रही है। प्रोजेक्ट के टेंडर से लेकर वर्क ऑर्डर और काम शुरू करवाने तक में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
यूआईटी में जैसे ही नया प्रोजेक्ट आता कमल मीणा अपना पुराना प्रोजेक्ट छोड़कर नया प्रोजेक्ट पकड़ लेते। मीणा ने वेस्ट जोन का नेहरू घाट, सबसे बड़ी घंटी, नंदी घाट, शौर्य चौक, राजस्थानी घाट तक का काम किया है। बताया गया है कि अमूमन चार साल से अधिक कोई भी प्रतिनियुक्ति पर नहीं रह सकता है, लेकिन मीणा यहां 13 साल से काम कर रहे हैं। इन सभी कार्यों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सभी प्रोजेक्टों को लेकर भी एसीबी जांच करने वाली है। इस मामले को पूरी तरह से राजनीतिक संरक्षण के तौर पर देखा जा रहा है।
बताया जाता है कि कोटा में किसी भी अफसर की नियुक्ति तत्कालीन स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के बिना नहीं हो सकती है। यहां तक कि कांग्रेस सरकार में कोटा कलेक्टर व एसपी की नियुक्ति भी धारीवाल की सहमति के बिना नहीं हो सकती है। कोटा रिवर फ्रंट में भ्रष्टाचार को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं।
धारीवाल पर आरोप भी लगे हैं। धारीवाल के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की शिकायतें भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी से भी की गई थी। यही वजह है कि चुनाव में उनका टिकट एनवक्त पर हुआ। आगे देखना होगा कि कमल मीणा की जांच के दायरे में और कौन-कौन अधिकारी आएंगे जिनको राजनीतिक संरक्षण रहा है।

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