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ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास के प्रमुख इंजन : जयपुर में न्यू डेवलपमेंट बैंक के सेमिनार में बोलीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन

निजी पूंजी जुटाने में बहुपक्षीय बैंकों की भूमिका पर जोर
केन्द्रीय वित्त मंत्री ने निवेश के जोखिम को कम करने, परियोजनाओं को बैंक के लिए आकर्षक बनाने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में बहुपक्षीय विकास बैंकों की अहम भूमिका पर जोर दिया ताकि बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाई जा सके।
भारत के अनुभव पर बात करते हुए सीतारमन ने कहा कि भारत सरकार ने निरंतर सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और उससे जुड़े संरचनात्मक सुधारों के जरिए अपने अवसंरचना इकोसिस्टम को मजबूत किया है। एक दशक पहले की तुलना में सार्वजनिक निवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जो राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स प्रणालियों, डिजिटल अवसंरचना और ऊर्जा नेटवर्कों में उत्पादक राष्ट्रीय परिसंपत्तियां बनाने की रणनीति को दर्शाता है।
सार्वजनिक पूंजी को निजी निवेश का उत्प्रेरक बनाने के लिए भारत के प्रमुख सुधारसीतारमन ने कहा कि भारत सरकार का मानना है कि सार्वजनिक पूंजी को निजी निवेश का विकल्प नहीं बल्कि उसका उत्प्रेरक बनना चाहिए। इसके लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं:
व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding): आर्थिक रूप से सीमित लेकिन सामाजिक रूप से वांछनीय परियोजनाओं को समर्थन प्रदान करने हेतु।
हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल: सड़क बुनियादी ढांचे में जोखिम को संतुलित रूप से बांटने हेतु।
क्रेडिट बढ़ाने वाले उपाय: परियोजना की बैंक से ऋण मिलने की योग्यता (बैंकेबिलिटी) को बेहतर बनाने हेतु।
इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs): पूंजी का दोबारा उपयोग करने और दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने हेतु।
नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन: जो निवेशकों को दीर्घकालिक स्पष्टता प्रदान करती है।
पीएम गति शक्ति: मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान, जो तालमेल और कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है।
इसी आधार को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बताया कि केन्द्रीय बजट 2026-27 में नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, नए राष्ट्रीय जलमार्गों को शुरू करने और तटीय कार्गो प्रोत्साहन योजना जैसे कई लक्षित उपाय किए गए हैं।
ब्रिक्स देशों के समक्ष साझा चुनौतियां और साझेदारी
वित्त मंत्री सीतारमन ने बताया कि ब्रिक्स के सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक विकास के मुख्य इंजन हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाने में उन्हें एक जैसी संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चुनौती सिर्फ पूंजी की उपलब्धता की नहीं बल्कि भरोसा, स्थिरता, पूर्वानुमेयता और विश्वसनीय दीर्घकालिक ढांचे तैयार करने की भी है। उन्होंने जोर दिया कि विकासात्मक वित्त का भविष्य साझेदारी में निहित है।
आर्थिक कार्य विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि विकासात्मक वित्त अब ऐसे दौर में है जहां बड़े पैमाने पर काम करने के साथ-साथ मजबूती भी जरूरी है। पूंजी जुटाना ऐसे ढांचों पर आधारित होना चाहिए जो लंबे समय तक टिके रहें।
सेमिनार के बाद आईआरडीएआई के चेयरमैन अजय सेठ, एनडीबी के वाइस-प्रेसिडेंट रोमन सेरोव, सर्ट्रेडिंग के एलेसेंड्रो टेक्सीरा, टेनसेंट के सीनियर एडवाइजर योंगपिंग झाई, टाटा कैपिटल डिकार्बनाइजेशन फंड के पंकज सिंडवानी तथा अन्य प्रतिनिधियों के साथ एक विस्तृत पैनल चर्चा आयोजित हुई।
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