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अल्फा-जेनजी दोनों स्मार्ट हैं, पढ़ेंगे तो देश के लिए बेहतर करेंगे: एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला

नई पीढ़ी की क्षमताओं पर बात करते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि एक पीढ़ी दूसरी से ज्यादा सक्षम है। उनके मुताबिक अल्फा और जेनजी दोनों ही स्मार्ट और संभावनाओं से भरी पीढ़ियां हैं। जरूरत उन्हें सही दिशा देने और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक लक्ष्यों की ओर लगाने की है। आज के दौर में बच्चों के सामने अवसरों की कमी नहीं है। उनके पास जानकारी, तकनीक और कई तरह के संसाधन आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन इसी के साथ बहुत सारे ध्यान भटकाने वाली चीजें भी हैं। ऐसे माहौल में सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना है कि किस चीज पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
शुभांशु शुक्ला ने कहा कि बच्चों के साथ संवाद के दौरान उनकी जिज्ञासा साफ दिखाई दी। उन्हें अपने भविष्य को लेकर कई सवाल हैं और वे जानना चाहते हैं कि किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। बच्चों तक सही और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।
अपने अंतरिक्ष मिशन और व्यक्तिगत यात्रा के पीछे परिवार और दोस्तों की भूमिका के सवाल पर शुभांशु शुक्ला ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम नहीं होती। इसके पीछे परिवार, मित्रों और पूरी टीम का योगदान होता है। अपने मिशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें हजारों लोगों की मेहनत शामिल रही। इसरो की टीम, एक्सिओम की टीम, उनके मित्रों और खास तौर पर परिवार ने उनका लगातार सहयोग किया। इन लोगों के समर्थन के बिना इस तरह की उपलब्धि हासिल करना संभव नहीं होता।
उन्होंने बच्चों को संदेश देते हुए कहा कि परिवार और दोस्तों को अपनी सफलता की यात्रा का हिस्सा बनाना चाहिए। जीवन में कभी-कभी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं और व्यक्ति को लग सकता है कि सब कुछ गलत हो गया है, लेकिन किसी एक समय की परेशानी को पूरी यात्रा का निष्कर्ष नहीं मानना चाहिए। लंबे समय के नजरिए से देखें तो परिवार का साथ बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुश्किल समय में वही सबसे मजबूती से व्यक्ति के साथ खड़ा रहता है।
--आईएएनएस
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