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ग्लोबल हेल्थ डेवलपमेंट की मिसाल : नारायण सेवा संस्थान का ‘वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी’ हॉस्पिटल

दिव्यांगों का जीवन अब नई उड़ान पाए,
‘वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी’ हर उम्मीद को सजाए।
मीडिया कर्मियों ने बुधवार को इस बहुमंजिला भवन का अवलोकन किया। इस दौरान संस्थान ट्रस्टी देवेंद्र चौबीसा, मीडिया प्रभारी विष्णु शर्मा हितैषी और जनसंपर्क प्रमुख भगवान प्रसाद गौड़ उपस्थित थे।
एक छत के नीचे—सभी सेवाओं की परिकल्पना : 8 फरवरी 2020 को भूमि पूजन के साथ यह संकल्प लिया गया कि दिव्यांगजन को उपचार से लेकर पुनर्वास तक की सभी सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएँगी। महामारी के कठिन समय में भी निर्माण कार्य नहीं रुका क्योंकि लक्ष्य सिर्फ एक इमारत बनाना नहीं, बल्कि हजारों जरूरतमंद लोगों के जीवन में बदलाव लाना था।
आधुनिक चिकित्सा और मानवीय मूल्यों का संगम : 11 मंजिला यह केंद्र लगभग 2.40 लाख वर्ग फीट में बनाया गया है। पूरा परिसर वातानुकूलित है और ग्लोबल हेल्थ स्टैंडर्ड्स के अनुरूप नवीनतम चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित है।
मुख्य विशेषताएं : 450 बेड का आधुनिक अस्पताल, हड्डी, पोलियो, क्लबफुट और अन्य सर्जरी के लिए दो उन्नत ऑपरेशन थिएटर, अत्याधुनिक फिजियोथेरपी और रिहैबिलिटेशन सेंटर, कृत्रिम हाथ-पैर और ऑर्थोटिक उपकरणों की इन-हाउस निर्माण इकाई, रोजगार-केंद्रित प्रशिक्षण जैसे—मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर प्रशिक्षण, फैशन डिज़ाइनिंग, टेलरिंग आदि।
विशेष योग्य बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय, जहाँ शिक्षा, पोषण और मनोवैज्ञानिक सहयोग एक साथ मिलेगा
सबसे महत्वपूर्ण—सभी सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क : अत्याधुनिक और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर (Global Health Standards के अनुरूप), इस अस्पताल में कई आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जो इसे एक स्थायी और उच्च स्तरीय हेल्थकेयर मॉडल बनाती हैं। ग्रीन और सस्टेनेबल बिल्डिंग डिज़ाइन, सोलर पावर प्लांट और RO शुद्ध पानी की व्यवस्था, बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) और एक्सेस कंट्रोल, NABH मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सुविधाएं, लेज़र आधारित डायग्नोसिस, 3D प्रिंटिंग तकनीक और CAD-CAM टेक्नोलॉजी, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर।
सेंट्रल फैब्रिकेशन यूनिट और थेरैपी आधारित डिजाइन किया गया CP पार्क
सशक्तिकरण का केंद्र—नए जीवन की शुरुआत
संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा—“यह केंद्र सिर्फ इलाज नहीं करता, यह अवसर देता है। यहाँ आने वाला हर व्यक्ति आत्मविश्वास लेकर लौटेगा कि वह सक्षम है, अपनी जिंदगी को नए सिरे से जी सकता है।”
यह केंद्र दिव्यांगजन को उपचार, कृत्रिम अंग, रिहैबिलिटेशन और कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें समाज के विकास में सक्रिय भागीदार बनाने का लक्ष्य रखता है।
मानव सेवा की यात्रा—समाज की भागीदारी से संभव
संस्थान संस्थापक कैलाश मानव ने बताया कि 1985 से शुरू हुई सेवा यात्रा आज देश-विदेश तक पहुँच चुकी है। समाज के सहयोग से यह कार्य लाखों जरूरतमंदों के जीवन में आशा की किरण बन रहा है।
अगले 25 वर्षों के संकल्प (ग्लोबल स्तर पर प्रभाव डालने वाले लक्ष्य)
संस्थान ने आने वाले वर्षों के लिए कई बड़े लक्ष्य तय किए हैं—
स्वास्थ्य एवं पुनर्वास लक्ष्य : 7,02,000 शल्य चिकित्सा, हर वर्ष 15% अधिक सर्जरी, 9,36,000 दिव्यांगजन को हर वर्ष बढ़ती संख्या के साथ सहायक उपकरण, 2,34,000 कृत्रिम अंगों का निर्माण और वितरण, 98,46,400 रोगियों को निःशुल्क फिजियोथेरेपी, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण, 2,550 दिव्यांग जोड़ों के विवाह, 50 सामूहिक विवाह समारोह, 7,500 लोगों को कौशल प्रशिक्षण, 400 निःशुल्क सेवा केंद्र व हर वर्ष 15 नए केंद्र।
राष्ट्रीय विस्तार : 4,500 स्वास्थ्य शिविर, 150 वार्षिक दिव्यांग जांच शिविर, 6,000 नई शाखाओं की स्थापना, 1 करोड़ से अधिक जरूरतमंद लोगों को भोजन और राशन, पूरे देश में 300 P&O वर्कशॉप।
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