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#Ajmer यूडी टैक्स कलेक्शन का टेंडर फिर रद्द, अफसर ही कर रहे सरकार के राजस्व का नुकसान

khaskhabar.com : मंगलवार, 11 जून 2024 4:46 PM (IST)
#Ajmer यूडी टैक्स कलेक्शन का टेंडर फिर रद्द, अफसर ही कर रहे सरकार के राजस्व का नुकसान
अजमेर। नगर निगम में भ्रष्टाचार और अफसरों की लापरवाही के कारण अजमेर शहर में यूडी टैक्स कलेक्शन का टेंडर एक बार फिर रद्द हो गया है। इस टेंडर को GIS consortium pvt ltd को दिए जाने के प्रयास किए जा रहे थे, जिसके पास टैक्स कार्यों का कोई अनुभव ही नहीं है। जोधपुर एवं अलवर नगरीय निकायों ने भी इस फर्म को न्यूनतम योग्यता भी नहीं होने के कारण अयोग्य़ माना था। इसके बावजूद अजमेर नगर निगम के अफसरों की मेहरबानी देखिए कि इस फर्म द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्रों टेंडर आकलन समिति ने सही मानते हुए काम देने की तैयारी कर ली थी। लेकिन, स्वायत शासन विभाग के निदेशक ने जयपुर की एक फर्म की अपील के आधार पर अब यूडी टैक्स कलेक्शन के टेंडर को रद्द करने के आदेश दिए हैं। क्योंकि इसमें अजमेर नगर निगम अफसरों के भ्रष्टाचार की बू आ रही है।

दरअसल, इस टेंडर को मैसर्स ए टू जेड इन्फोटेक बिजनेस सॉल्यूशन एलएलपी की अपील के आधार पर रद्द किया गया है। जबकि इसी टेन्डर में अन्य फर्म स्पैरो सॉफ्टटेक प्रा. लि. कंपनी को जयपुर नगर निगम कई बार तय मापदंडों से कम राजस्व वसूली और कंपनी कर्मचारियों द्वारा लोगों से नाजायज वसूली के मामले में न केवल नोटिस दे चुका है। बल्कि ब्लैकलिस्ट करने की भी चेतावनी दी जा चुकी है। इतना ही नहीं कंपनी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में पिछले दिनों एक शिकायत भी दर्ज हो चुकी है।
पहले भी हाईकोर्ट की फटकार के बाद रद्द करना पड़ा था टेंडरः
सूत्रों के मुताबिक अजमेर शहर में यूडी टैक्स कलेक्शन का मामला करीब दो साल से लंबित चल रहा है। पहले तत्कालीन निगम आयुक्त सुशील कुमार ने पुणे महाराष्ट्र की एक चहेती फर्म को टेंडर आदेश ही दे दिया था औऱ इसके लिए टेंडर में RTPP एक्ट के प्रावधानों का जमकर उल्लंघन किया गया था।
प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर करीब 5 करोड़ रुपए के इस टेंडर में ऑल इंडिया लोकल सेल्फ गवर्नमेंट संस्था पर नगर निगम के अफसरों की शुरू से ऐसी मेहरबानी बरसी कि टेंडर में हेराफेरी करके वर्क ऑर्डर तक जारी कर दिए गए। हालत यह हुई कि दूसरी ठेकेदार फर्मों की आपत्तियों को भी दरकिनार कर दिया गया। मजबूरन उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई के बाद स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक को सुनवाई करके मामले को जल्द निस्तारण करने को कहा था। तत्कालीन निदेशक हृदेश कुमार ने 18 दिसंबर, 2023 को इस टेंडर को सुनवाई के बाद रद्द कर दिया था। उन्होंने भी इसमें RTPP एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन माना था। इसके बाद नगर निगम ने नए सिरे से मार्च, 2024 में टेंडर किए थे।
केंद्र सरकार रोक सकती है अजमेर नगर निगम की ग्रांट राशिः
सूत्रों का कहना है कि 15वें वित्त आयोग द्वारा जारी गाइड लाइन के तहत राज्य के सभी नगरीय निकायों को राजस्व आय के मामले में आत्मनिर्भर बनना है। इसमें यूडी टैक्स कलेक्शन भी एक प्रमुख जरिया है। इसके अभाव में केंद्र सरकार अजमेर नगर निगम की ग्रांट राशि रोक सकती है।
रोचक तथ्य यह है कि प्रदेश के कई नगरीय निकाय बिना पैसा खर्च किए प्रॉपर्टी सर्वे करवाकर यूडी टैक्स संग्रहण कर रहे हैं। लेकिन, अजमेर नगर निगम के अफसर निगम के 5 करोड़ रुपए लगाकर चहेती फर्म को यूडी टैक्स वसूली का टेंडर देने पर आमादा है। यह जांच का विषय है। वैसे, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो भी इस मामले की जांच शुरू करने की तैयारी में है।
क्या अब सरकार गलत प्रमाण-पत्र देने वाली फर्म को ब्लैक लिस्ट करेगीः
स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक सुरेश कुमार ओला की ओर से 10 जून, 2024 को जारी आदेश के मुताबिक RFP के पृष्ठ संख्या 22-23 पर pre qualification criteria के बिंदु संख्या H (the bidder should have completed or ongoing experience for similar work of survey of properties using mobile application duly integrated with IT enabled web portal including generation of tax notices and collection of UD/Property tax for any council/corporation/ nagar nigam Level ULB लिखा हुआ है।
लेकिन, चयनित कंपनी को इस तरह का कोई अनुभव नहीं होते हुए भी निगम अफसरों ने उसका चयन कर लिया। वह भी तब जबकि खासखबर डॉट कॉम पहले ही प्रकाशित कर चुका था कि जिस कंपनी का चयन किया गया है, उसे अलवर और जोधपुर नगर निगम पहले ही अयोग्य घोषित कर चुके हैं।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस कंपनी को ब्लैक लिस्ट करेगी। क्योंकि इस कंपनी ने हिमाचल के मंडी नगर निगम का फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र टेंडर लेने के लिए पेश किया था। आरटीआई में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि साल 2015 से यूडी टैक्स कलेक्शन का काम मंडी नगर निगम खुद अपने स्तर पर कर रहा है ना कि किसी फर्म के जरिए।

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