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अजमेर दरगाह : कोर्ट ने स्वीकार की दूसरी याचिका, राजस्थान सरकार और दरगाह कमेटी को नोटिस जारी

याचिका में किए गए मुख्य दावे : शिवलिंग की मौजूदगी- याचिका में दावा किया गया है कि दरगाह के नीचे संकट मोचन महादेव का प्राचीन मंदिर और शिवलिंग मौजूद है, जहाँ पुराने समय में पूजा होती थी।
जनसमर्थन का साक्ष्य : न्यायालय में सवा लाख लोगों के शपथ पत्र (Affidavits) पेश किए गए हैं। ये लोग राजस्थान में की गई 7800 किलोमीटर की यात्रा के दौरान महाराणा प्रताप सेना के संपर्क में आए थे।
साक्ष्य के तौर पर नक्शे : याचिकाकर्ता का दावा है कि उन्होंने दरगाह के नक्शे, रेकी रिपोर्ट और शिवलिंग के चित्रों सहित कई महत्वपूर्ण सबूत कोर्ट को सौंपे हैं।
40 वर्षों से बंद मंदिर जल्द खुलेगा : राजवर्धन सिंह परमार ने कोर्ट के फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। दरगाह के नीचे बंद भगवान शिव का मंदिर जल्द खुलेगा और हम पुष्कर से पवित्र जल लाकर वहां अभिषेक करेंगे।"
21 फरवरी को होगी अगली बड़ी सुनवाई : गौरतलब है कि इसी तरह की पहली याचिका हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा 27 नवंबर 2024 को दायर की गई थी। अब कोर्ट ने दोनों याचिकाओं पर अगली सुनवाई के लिए 21 फरवरी 2026 की तारीख तय की है। दरगाह कमेटी द्वारा पेश की गई '7/11' की अर्जी (याचिका की विचारणीयता पर सवाल) पर भी इसी दिन बहस होने की संभावना है।
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