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आखिर इन दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मौन क्यों हैं?

khaskhabar.com: सोमवार, 07 सितम्बर 2026 12:38 PM (IST)
आखिर इन दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मौन क्यों हैं?
- सुरेंद्र चतुर्वेदी -
इन दिनों अमित शाह मौन क्यों हैं? भाजपा पर निगाह रखने वाले देश के राजनीतिक समीक्षक और पत्रकार इस प्रश्न को लेकर असहज हैं। संभवत: 2014 के बाद यह पहला मौका है जब भाजपा में अमित शाह की राजनीतिक अनुपस्थिति को देखा जा रहा है। कहा यह भी जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंबे अंतराल के बाद जिस तरह से भाजपा के संगठन को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ाई है, वह स्थिति भी अमित शाह की चुप्पी के रहस्य को और गहराती है। दूसरी तरफ़ अमित शाह के गृह मंत्रालय में अधिक सक्रियता के समाचार भी आ रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में विजय के बाद सीमा सुरक्षा पर काम उनकी प्राथमिकता पर है, इसके अलावा दक्षिण भारत के राज्यों में नदी जल बँटवारे पर राज्यों के बीच आपसी सहमति बढ़ाना भी महत्वपूर्ण कदम है, जिस पर अमित शाह पहल करते हुए दिख रहे हैं। इन सबके बावजूद राजनीतिक क्षेत्रों में अमित शाह की खामोशी की चर्चा है। कहा यह भी जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में अमित शाह की भूमिका बहुत सीमित रहने वाली है।
भाजपा ने उत्तर प्रदेश का चुनाव पूरी तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की रणनीति पर ही लड़ने का निर्णय किया है। इस निर्णय के पीछे 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को आई कम सीटें हैं। तब योगी के समर्थकों की तरफ़ से यह कहा गया था कि दिल्ली के हस्तक्षेप के कारण भाजपा को नुक़सान उठाना पड़ा। तो क्या यह माना जाना चाहिए कि भाजपा आने वाले विधानसभा चुनावों में अमित शाह के विकल्पों को आजमाना चाहती है।
क्या अमित शाह के मौन का राज प्रधानमंत्री मोदी के उत्तराधिकार पर उठी चर्चाओं में छुपा है। क्योंकि मंत्री मंडल के पुनर्गठन को लेकर आई ख़बरों में शाह को उप प्रधानमंत्री बनाये जाने की चर्चा जोरों पर थी। हालाँकि, यह कहा जाता रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी अमित शाह की आक्रामक रणनीति को लेकर सहज नहीं है, इसलिए वो अमित शाह के स्थान पर योगी आदित्यनाथ या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को आगे करने पर विचार कर रहा है।
लेकिन इन सब घटनाओं का यह अर्थ लगाना मूर्खता ही होगी कि अमित शाह जैसे आक्रामक रणनीतिक राजनेता को भाजपा किनारे कर रही है। उनका और मोदी या भाजपा का साथ केवल राजनीतिक ही नहीं आत्मिक भी है। यह एक ऐसा योग है जिसका तोड़ किसी के भी पास नहीं है।
नोटः लेखक सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च एंड डेवलपमेंट जयपुर के निदेशक हैं

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