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भारत से ननकाना साहिब भेजी गई भव्य गोल्डन पालकी, अटारी-वाघा बॉर्डर से पाकिस्तान के लिए हुई रवाना

कहाँ होगी सुशोभित: इस सुंदर पालकी साहिब को गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब में स्थापित किया जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इसके दर्शन कर सकें।
पालकी साहिब को सीमा पार भेजने के लिए भारतीय सुरक्षा और प्रशासनिक महकमे ने मुस्तैदी दिखाई:
भारतीय कस्टम विभाग के कमिश्नर ए. पी. चौधरी, सुपरिंटेंडेंट अशोक कुमार तथा सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों ने सभी जरूरी और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं।
कागजी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद भारतीय कस्टम अधिकारियों ने पालकी साहिब को पाकिस्तान कस्टम विभाग के सुपुर्द किया।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के जत्था लीडर भाई भूपिंदर सिंह भलवान ने बताया कि वाघा सीमा पर पाकिस्तान के सिख नेता रमेश सिंह अरोड़ा तथा भाई महेश सिंह के सहयोगियों को यह पालकी साहिब औपचारिक रूप से सौंप दी जाएगी।
दोनों देशों के धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने इस पवित्र पहल का दिल से स्वागत किया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि:
यह कदम गुरु नानक देव जी की मूल शिक्षाओं— प्रेम, आपसी भाईचारे और मानव सेवा का एक जीवंत प्रतीक है।
इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से दोनों देशों के बीच आपसी संबंध और अधिक मजबूत व सौहार्दपूर्ण बनते हैं।
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