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एटा में राम मंदिर के लिए बन रहा है 2,100 किलोग्राम के घंटा

'अष्टधातु' के इस घंटे में - सोना, चांदी, तांबा, जस्ता, सीसा, टिन, लोहा और पारा का संयोजन है।
देश के 'सबसे बड़ी घंटों' में शुमार इस घंटे को बनाने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों की 25 कारीगरों की टीम ने एक महीने तक हर दिन 8 घंटे काम किया है।
जलेसर नगर परिषद के अध्यक्ष और इस वर्कशॉप के मालिक विकास मित्तल ने कहा, "यह घंटा राम मंदिर को दान किया जाएगा।"
वहीं विकास के भाई आदित्य मित्तल कहते हैं, "हमारा मानना है कि कुछ दैवीय कारणों के चलते यह काम हमारे पास आया। इसीलिए हमने इस घंटे को मंदिर को दान करने का फैसला किया है।"
घंटे की लागत 21 लाख रुपये आई है और इसे बनाने की प्रारंभिक योजना से लेकर बनकर तैयार होने तक में 4 महीने का समय लगा।
बता दें कि मित्तल को यह घंटा तैयार करने का आदेश निर्मोही अखाड़े से मिला था, जो कि कोर्ट में चले अयोध्या विवाद में एक वादी था।
--आईएएनएस
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