Raja Shivaji Review: The Roar of History, Maratha Glory Comes Alive on the Big Screen-m.khaskhabar.com
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राजा शिवाजी रिव्यू: इतिहास की गर्जना, परदे पर उतरा मराठा साम्राज्य का गौरव

khaskhabar.com: शुक्रवार, 01 मई 2026 12:16 PM (IST)
राजा शिवाजी रिव्यू: इतिहास की गर्जना, परदे पर उतरा मराठा साम्राज्य का गौरव
रितेश देशमुख की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘राजा शिवाजी’ जब सिनेमाघरों में पहुंचती है, तो यह सिर्फ एक ऐतिहासिक कहानी नहीं सुनाती, बल्कि एक युग, एक विचार और एक स्वाभिमान को जीवंत कर देती है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित यह फिल्म अपने भव्य कैनवास, दमदार अभिनय और तकनीकी उत्कृष्टता के कारण शुरुआत से ही चर्चा में है। ‘राजा शिवाजी’ उन फिल्मों में शामिल हो जाती है, जो इतिहास को केवल दोहराती नहीं, बल्कि उसे महसूस करवाती हैं। इतिहास को जीवंत करता निर्देशन
रितेश देशमुख ने निर्देशक के रूप में जो परिपक्वता दिखाई है, वह इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। उन्होंने शिवाजी महाराज के जीवन के विभिन्न पहलुओं—राजनीतिक चतुराई, युद्ध कौशल और जनसामान्य के प्रति उनके दृष्टिकोण—को संतुलित ढंग से प्रस्तुत किया है। फिल्म कहीं भी अनावश्यक नाटकीयता का शिकार नहीं होती, बल्कि हर दृश्य एक उद्देश्य के साथ आगे बढ़ता है। खासतौर पर राज्याभिषेक का दृश्य, जिसमें पूरे मराठा साम्राज्य की गरिमा और गौरव झलकता है, निर्देशन की बारीकी को दर्शाता है।
रितेश देशमुख का करियर-बेस्ट प्रदर्शन
मुख्य भूमिका में रितेश देशमुख ने खुद को पूरी तरह इस किरदार में ढाल लिया है। उनकी आंखों में दृढ़ता, संवादों में आत्मविश्वास और युद्ध के दृश्यों में उनकी ऊर्जा यह दर्शाती है कि उन्होंने इस भूमिका को सिर्फ निभाया नहीं, बल्कि जिया है। खासकर अफजल खान से मिलने का दृश्य, जहां तनाव, रणनीति और मनोवैज्ञानिक खेल एक साथ नजर आते हैं, वहां उनका अभिनय चरम पर दिखाई देता है। यह दृश्य फिल्म का एक बड़ा हाईलाइट बनकर उभरता है।
दिल को छू लेने वाला विशेष दृश्य
फिल्म का एक बेहद भावुक और प्रभावशाली दृश्य वह है, जब शिवाजी महाराज अपनी माता जीजाबाई के साथ संवाद करते हैं। इस दृश्य में एक ओर पुत्र का कर्तव्य और दूसरी ओर एक मां का अटूट विश्वास—दोनों का संगम देखने को मिलता है। यहां संवाद कम हैं, लेकिन भावनाएं बेहद गहरी हैं। कैमरा क्लोज-अप में चेहरे के भावों को जिस तरह कैद करता है, वह दर्शकों को भीतर तक छू जाता है और यही फिल्म का भावनात्मक शिखर बन जाता है।

भव्यता और जोश से भरपूर संगीत

फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर इसकी आत्मा है। ‘जय शिवराय’ जैसा गीत सिनेमाघरों में एक अलग ही ऊर्जा पैदा करता है। युद्ध के दृश्यों में बजने वाला बैकग्राउंड स्कोर दर्शकों के भीतर रोमांच और जोश को कई गुना बढ़ा देता है। वहीं, भावनात्मक दृश्यों में संगीत का संतुलित उपयोग फिल्म को गहराई प्रदान करता है।

सशक्त सपोर्टिंग कास्ट का योगदान

फिल्म में मौजूद सहायक कलाकारों की लंबी सूची इसे और मजबूत बनाती है। संजय दत्त और अभिषेक बच्चन अपने किरदारों में प्रभावशाली नजर आते हैं और कहानी को मजबूती देते हैं। विद्या बालन और भाग्यश्री फिल्म में भावनात्मक गहराई जोड़ती हैं। जितेंद्र जोशी, अमोले गुप्ते और जेनेलिया देशमुख जैसे कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को पूरी ईमानदारी से निभाया है, जिससे फिल्म का हर फ्रेम जीवंत लगता है।
तकनीकी पक्ष: आंखों को चौंकाने वाला अनुभव
संतोष सिवान की सिनेमैटोग्राफी फिल्म को एक भव्य दृश्य अनुभव में बदल देती है। मराठा किलों की विशालता, युद्ध के मैदान की धूल और तलवारों की चमक—हर चीज को बेहद खूबसूरती से कैद किया गया है। ‘चंद्रराव मोरे’ वाला एक्शन सीक्वेंस फिल्म का हाईलाइट है, जहां कैमरा मूवमेंट और एडिटिंग मिलकर एक अद्भुत सिनेमाई अनुभव तैयार करते हैं।
सरप्राइज कैमियो: दर्शकों के लिए बोनस
फिल्म के क्लाइमैक्स में सुपरस्टार सलमान खान का कैमियो दर्शकों के लिए सरप्राइज पैकेज की तरह आता है। यह छोटा-सा लेकिन प्रभावशाली हिस्सा सिनेमाघरों में तालियों और सीटियों की गूंज पैदा करता है और फिल्म के प्रभाव को और बढ़ा देता है।
एडवांस बुकिंग और बॉक्स ऑफिस की धमाकेदार शुरुआत
फिल्म ने रिलीज से पहले ही एडवांस बुकिंग में शानदार प्रदर्शन किया, जिससे यह साफ हो गया था कि दर्शकों में इसके प्रति जबरदस्त उत्साह है। शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत करने की ओर बढ़ रही है और पहले ही दिन दोहरे अंकों में कमाई करने की क्षमता रखती है।
एक सच्चा ऐतिहासिक अनुभव
कुल मिलाकर ‘राजा शिवाजी’ एक ऐसी फिल्म है जो भव्यता, भावनाओं और ऐतिहासिक गौरव का बेहतरीन संगम प्रस्तुत करती है। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि दर्शकों को अपने इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का काम भी करती है। रितेश देशमुख का निर्देशन, उनका अभिनय, शानदार संगीत और तकनीकी उत्कृष्टता—ये सभी तत्व मिलकर इस फिल्म को एक यादगार सिनेमाई अनुभव बनाते हैं। एक समीक्षक के रूप में कहा जा सकता है कि ‘राजा शिवाजी’ भारतीय सिनेमा में ऐतिहासिक फिल्मों के स्तर को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है।

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