प्यार और बदले की आग में तपती 'ओ रोमियो', शाहिद कपूर के दमदार अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल

फिल्म का हर कलाकार अपने किरदार में पूरी तरह फिट बैठता है। शाहिद कपूर का किरदार उस्तारा उनके करियर के बेहतरीन रोल्स में से एक माना जा रहा है। उनका अभिनय बेहद प्रभावशाली है। तृप्ति डिमरी का रोल अफशां अपनी मासूमियत और बदले की आग, दोनों को बखूबी दिखाती हैं। अविनाश तिवारी ने जलाल के रूप में दर्शकों को चौंका दिया है। उनका लुक, सिर पर बना टैटू और सख्त अंदाज किरदार को डरावना बनाता है। उनका अभिनय इतना अलग है कि कई जगह पहचानना मुश्किल हो जाता है।
शाहिद और तृप्ति की जोड़ी नई होते हुए भी स्वाभाविक लगती है।
वहीं नाना पाटेकर और फरीदा जलाल जैसे अनुभवी कलाकार फिल्म में जान डाल दिखते हैं। नाना पाटेकर के डायलॉग्स सीधे दर्शकों पर गहरा असर छोड़ते हैं, वहीं फरीदा जलाल की दमदार लाइन्स फिल्म को मजबूती देती हैं। फिल्म में हास्य सीन्स भी रखे गए हैं, लेकिन उन्हें बेहद समझदारी से जोड़ा गया है। हास्य कहानी की गंभीरता को तोड़ता नहीं, बल्कि कुछ पलों के लिए राहत देता है।
संगीत फिल्म की एक और बड़ी खासियत है। विशाल भारद्वाज का संगीत भावनाओं को और गहरा करता है। गाने कहानी के साथ चलते हैं। 'आशिकों की कॉलोनी' और 'पान की दुकान' जैसे गाने फिल्म में एनर्जी लाते हैं।
डांस नंबर में दिशा पाटनी और शाहिद कपूर की केमिस्ट्री खास तौर पर ध्यान खींचती है। दोनों का डांस दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है।
निर्माता साजिद नाडियाडवाला ने इस फिल्म के साथ अपनी शानदार फिल्मों की लिस्ट में एक और मजबूत नाम जोड़ दिया है। इससे पहले वे 'छिछोरे', '83', 'तमाशा', और 'चंदू चैंपियन' जैसी यादगार फिल्में दे चुके हैं। 'ओ रोमियो' उनकी उसी सोच और सिनेमाई दृष्टि को आगे बढ़ाती है।
--आईएएनएस
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