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फिल्म समीक्षा : फ्रेडी—बेहतरीन अभिनय, कथा-पटकथा कमजोर, कार्तिक भारी

khaskhabar.com : शुक्रवार, 02 दिसम्बर 2022 3:34 PM (IST)
फिल्म समीक्षा : फ्रेडी—बेहतरीन अभिनय, कथा-पटकथा कमजोर, कार्तिक भारी
—राजेश कुमार भगताणी

राम माधवानी के निर्देशन में बनी धमाका के ओटीटी पर आने के बाद एक बार फिर कार्तिक आर्यन ओटीटी के जरिये दर्शकों के सामने हैं। 2 दिसम्बर को उनकी फिल्म फ्रेडी का डिज्नी हॉटस्टार पर प्रीमियर हुआ है। यह फिल्म अब डिज्नी पर किसी भी वक्त देखी जा सकती है। भुलभूलैया-2 की अपार सफलता के बाद कार्तिक की फिल्म को ओटीटी पर क्या सोचकर निर्माताओं ने पेश किया है यह समझ से बाहर है।

फिल्म में कार्तिक आर्यन एक डेंटिस्ट की भूमिका में नजर आए हैं। फिल्म का निर्देशन शशांक घोष ने किया है जो अतीत में खूबसूरत, वीरे दी वेडिंग, प्लान ए प्लान बी सरीखी फिल्में दर्शकों को दे चुके हैं।

फिल्म फ्रेडी डॉक्टर फ्रेडी गिनवाला (कार्तिक आर्यन) की कहानी है जो कि एक डेंटिस्ट है और अपने जीवन साथी की तलाश में है। पार्टनर की तलाश में फ्रेडी कई मैट्रिमोनियल वेबसाइट साइन अप करता है, साथ ही लड़कियों से भी मिलता है। लेकिन तालमेल की कमी के कारण वह आगे नहीं बढ़ पाता है। वहीं एक शादी में फ्रेडी की मुलाकात कायनाज ईरानी (अलाया एफ) से होती है, जिसे वह पहली नजर में ही दिल दे बैठता है। फ्रेडी के ख्वाब तब चकनाचूर हो जाते हैं, जब उसे पता चलता है कि अलाया एफ, रुस्तम (सज्जाद डेलाफ्रोज) से शादी कर रही है। लेकिन यहां उनकी प्रेम कहानी का अंत नहीं होता। दोनों की मुलाकात एक बार फिर डॉक्टर और मरीज के रूप में होती है। डॉक्टर होने के नाते फ्रेडी कायनाज से दोबारा मिलता है। धीरे-धीरे उसे पता चलता है कि कायनाज की शादी ऐसे शख्स से हुई है जो उसे मारता-पीटता है। वहीं कायनाज को भी फ्रेडी का साथ पसंद आता है, लेकिन रुस्तम के कारण दोनों साथ नहीं आ पाते। फ्रेडी के मन में बसा कायनाज का प्यार और जुनून धीरे-धीरे उसे अपराधी में तब्दील करने लगता है।

फिल्म का सबसे सशक्त पहलू कार्तिक आर्यन का अभिनय है। शर्मीले, हंसमुख और प्यारे डेंटिस्ट से लेकर प्लानिंग प्लॉटिंग करने वाले शख्स तक कार्तिक आर्यन का सफर लाजवाब रहा। उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को न सिर्फ प्रभावित किया है, अपितु उन्होंने उन्हें डराया भी है। अलाया एफ ने भी दर्शकों को खासा प्रभावित किया है। उन्हें जितनी देर परदे पर आने का मौका मिला उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है। फिल्म देखकर कहा जा सकता है कि निर्देशक ने अलाया को ज्यादा मौका देना बेहतर नहीं समझा। फिल्म में प्लॉट और स्क्रीनप्ले ठीक-ठाक कहे जा सकते हैं।

बात अगर कथानक की है तो जब तब फिल्म में बदले की भावना का पहलू नहीं आता तब तक वह दर्शकों को बांधने में सफल रही है, लेकिन जैसे ही बदले की भावना का पहलू आता है, फिल्म कुछ उखड़ सी जाती है। जिस तरीके से फ्रेडी बदला लेने का प्रयास करता है वह कमजोर नजर आते हैं। फ्रेडी के प्लॉट और ट्विस्ट पूरी तरह से बदले पर निर्भर करते हैं, लेकिन इसकी योजना ठीक तरह से नहीं बनाई गई। पूरी फिल्म में यह कहीं भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि कार्तिक आर्यन ने अपने बचपन के डर पर किस तरह से काबू में किया। वह अभी भी डरता है या नहीं।
कार्तिक आर्यन फ्रेडी के जरिए पहली बार इस तरह की भूमिका में नजर आए हैं। ऐसे में यह फिल्म कार्तिक आर्यन के नए अवतार के लिए देखी जा सकती है। डॉक्टर फ्रेडी का किरदार निभाने के लिए कार्तिक आर्यन ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था और यह बात उनकी परफॉर्मेंस में बखूबी झलकती है। अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर कोई किरदार चुनने के लिए भी कार्तिक आर्यन की तारीफ की जा सकती है।

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