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मूवी रिव्यू अल्फा : दमदार एक्शन और शानदार अभिनय के बावजूद कमजोर कहानी से पिछड़ी फिल्म

कहानी
फिल्म की कहानी सीता नाम की एक ऐसी युवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके शरीर में विशेष सीरम मौजूद है। इसी वजह से उसमें असाधारण ताकत और क्षमताएं विकसित हो जाती हैं। उसे देश का सबसे शक्तिशाली सैनिक बनाने के उद्देश्य से प्रशिक्षित किया जाता है, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि वह अपने ही मिशन से भटक जाती है।
इसके बाद उसकी नजर देश की गुप्त एजेंसी के प्रमुख विक्रांत कौल पर होती है। उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए वह स्पेन में रहने वाली दुर्गा तक पहुंचती है। धीरे-धीरे उसे एहसास होता है कि उसका अतीत इन दोनों से जुड़ा हुआ है। इसके बाद कहानी में कई रहस्य खुलते हैं और लगातार मोड़ आते हैं, जो फिल्म को आगे बढ़ाते हैं।
पटकथा
फिल्म की शुरुआत बेहद प्रभावशाली है। शुरुआती कुछ मिनटों में रहस्य, रोमांच और एक्शन का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है, जिससे दर्शकों की उत्सुकता बनी रहती है। हालांकि पात्रों की स्थापना के बाद कहानी अपनी पकड़ खोने लगती है।
पटकथा में कई ऐसे घटनाक्रम हैं जो तर्क से काफी दूर नजर आते हैं। कई दृश्य ऐसे हैं, जहां पात्रों के फैसले और उनका व्यवहार कहानी से मेल नहीं खाते। इसी वजह से फिल्म का भावनात्मक प्रभाव कमजोर पड़ जाता है। देशभक्ति का कोण जोड़ने की कोशिश भी की गई है, लेकिन उसे जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वह अपेक्षित असर छोड़ने में सफल नहीं हो पाता।
निर्देशन
निर्देशक शिव रवैल ने फिल्म को तकनीकी रूप से शानदार बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। बड़े सेट, अंतरराष्ट्रीय स्तर की लोकेशन और भव्य एक्शन दृश्य फिल्म को दृश्यात्मक रूप से आकर्षक बनाते हैं। हालांकि कहानी की गति और पात्रों की गहराई पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण फिल्म धीरे-धीरे बिखरती हुई महसूस होती है।
अभिनय
आलिया भट्ट ने कमजोर पटकथा के बावजूद प्रभावशाली अभिनय किया है। भावनात्मक दृश्यों में उनका अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है। बिना अधिक संवादों के भी वह अपने भावों को प्रभावी ढंग से दर्शाने में सफल रहती हैं।
शरवरी ने भी अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है। एक्शन दृश्यों में उनकी मौजूदगी प्रभाव छोड़ती है और उनका आत्मविश्वास साफ दिखाई देता है।
अनिल कपूर अपने सीमित लेकिन महत्वपूर्ण किरदार में हमेशा की तरह भरोसेमंद नजर आते हैं। वहीं बॉबी देओल खलनायक की भूमिका में प्रभावशाली दिखाई देते हैं और अपने अभिनय से कहानी में गंभीरता जोड़ते हैं। अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।
संगीत और तकनीकी पक्ष
फिल्म का संगीत उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता। कुछ गीत याद रह जाते हैं, लेकिन अधिकांश गीत कहानी में खास प्रभाव नहीं छोड़ते। वहीं पृष्ठभूमि संगीत एक्शन और रोमांच को बेहतर बनाने में मदद करता है।
छायांकन फिल्म की सबसे बड़ी खूबियों में शामिल है। विदेशी लोकेशन और एक्शन दृश्यों को बेहद आकर्षक ढंग से फिल्माया गया है। निर्माण सज्जा, दृश्य प्रभाव, वेशभूषा और एक्शन निर्देशन भी उच्च स्तर का है। संपादन संतुलित है, हालांकि दूसरे भाग में कुछ दृश्यों को और संक्षिप्त किया जा सकता था।
फिल्म की खूबियां
फिल्म का भव्य निर्माण, दमदार एक्शन दृश्य, शानदार दृश्य प्रभाव और मुख्य कलाकारों का अभिनय इसे देखने लायक बनाता है। शुरुआती हिस्सा दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहता है और तकनीकी स्तर पर फिल्म काफी मजबूत दिखाई देती है।
फिल्म की कमियां
कमजोर पटकथा, कई अतार्किक घटनाक्रम, भावनात्मक गहराई की कमी और साधारण निर्देशन फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरियां हैं। दूसरे भाग में कहानी बिखरती हुई महसूस होती है और कई मोड़ प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं हो पाते।
देखें या नहीं?
अगर आप बड़े पर्दे पर शानदार एक्शन, बेहतरीन दृश्य प्रभाव और आलिया भट्ट का अभिनय देखना चाहते हैं तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। लेकिन यदि आप मजबूत कहानी और दमदार पटकथा की उम्मीद लेकर सिनेमाघर जा रहे हैं तो यह फिल्म आपको पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाएगी।
अल्फा एक ऐसी फिल्म है जो अपने भव्य निर्माण, शानदार तकनीकी गुणवत्ता और कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय के दम पर ध्यान आकर्षित करती है। हालांकि कमजोर कहानी और फीका निर्देशन इसे एक यादगार स्पाई थ्रिलर बनने से रोक देते हैं। यही वजह है कि यह फिल्म उम्मीदों के मुकाबले औसत अनुभव देकर रह जाती है।
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