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कौन सा टेस्ट कब और क्यों जरूरी? जानें MRI, CT Scan और X-Ray से जुड़े भ्रम एवं उनकी हकीकत

इसी भ्रम के चलते लोग अक्सर X-Ray को पुरानी तकनीक मानकर खारिज कर देते हैं, तो वहीं Ultrasound को केवल गर्भावस्था तक सीमित समझते हैं। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि मेडिकल जांचें मोबाइल फोन की तरह नहीं होतीं कि सबसे महंगा मॉडल ही सबसे अच्छा हो। हर जांच की अपनी एक विशिष्ट भूमिका होती है, और बीमारी पकड़ने के लिए 'सही जांच' का चुनाव ही सबसे महत्वपूर्ण चाबी है।
X-Ray: हड्डियों और छाती का आज भी सबसे भरोसेमंद आधार
रेडियोलॉजी की दुनिया में X-Ray को भले ही प्राथमिक सीढ़ी माना जाता हो, लेकिन हड्डियों की चोट और फ्रैक्चर के मामलों में यह आज भी सबसे भरोसेमंद और त्वरित जांच है। जोड़ों का खिसकना, छाती में संक्रमण, दांतों की समस्या या गठिया (Arthritis) की शुरुआती पहचान के लिए X-Ray से बेहतर और किफायती विकल्प दूसरा नहीं है। यह महज कुछ मिनटों में हो जाता है और लगभग हर अस्पताल व क्लिनिक में सुलभ है। यद्यपि इसमें सूक्ष्म मात्रा में रेडिएशन (Radiation) होता है, जिससे गर्भवती महिलाओं को एहतियात बरतने की सलाह दी जाती है, फिर भी आवश्यकता पड़ने पर एक-दो X-Ray से शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
CT Scan: इमरजेंसी में जान बचाने वाली 'फास्ट' तकनीक
यदि शरीर के भीतर किसी गंभीर दुर्घटना, ब्रेन हैमरेज, सिर की चोट या आंतरिक अंगों में रक्तस्राव का तत्काल पता लगाना हो, तो CT Scan सबसे असरदार साबित होता है। यह तकनीक शरीर के अंदरूनी हिस्सों की विस्तृत क्रॉस-सेक्शनल तस्वीरें बहुत तेजी से प्रदान करती है। पेट की जटिल समस्याओं, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों और कैंसर की शुरुआती स्थिति को देखने में भी इसका व्यापक उपयोग होता है। हालांकि, CT Scan में X-Ray की तुलना में रेडिएशन की मात्रा अधिक होती है। कई मामलों में स्पष्ट तस्वीर के लिए मरीज को 'कॉन्ट्रास्ट इंजेक्शन' देना पड़ता है, जिससे गुर्दे (Kidney) के मरीजों या एलर्जी से पीड़ितों में विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है।
MRI: नसों, लिगामेंट और सॉफ्ट टिश्यूज का सटीक समाधान
यदि समस्या कमर दर्द, स्लिप डिस्क, नसों के दबने, घुटने या कंधे के लिगामेंट (Ligaments) की चोट, या दिमाग के ट्यूमर से जुड़ी हो, तो Magnetic Resonance Imaging (MRI) सबसे बेहतरीन विकल्प बनकर उभरता है। MRI की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी प्रकार का हानिकारक रेडिएशन नहीं होता, बल्कि यह मजबूत चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) और रेडियो तरंगों पर काम करता है। यह सॉफ्ट टिश्यूज (Soft Tissues) की बेहद बारीक और साफ तस्वीर देता है। हालांकि, इसमें 20 से 45 मिनट का समय लगता है, खर्च अधिक होता है और 'क्लोस्ट्रोफोबिया' (बंद जगह से डर) वाले मरीजों को मशीन के अंदर घबराहट हो सकती है। इसके अलावा, शरीर में धातु के पेसमेकर या इम्पलांट वाले मरीजों के लिए MRI प्रतिबंधित होता है।
Ultrasound से लेकर PET Scan तक:
हर जांच का अपना अलग दायराः अक्सर माना जाता है कि Ultrasound केवल गर्भावस्था (Pregnancy) के लिए है, जबकि वास्तविकता यह है कि पेट दर्द, पित्ताशय (Gall Bladder) की पथरी, किडनी, लिवर और थायरॉयड की बीमारियों को बिना किसी रेडिएशन और बिना दर्द के पकड़ने में यह पूरी तरह सुरक्षित और कारगर जांच है। इसी तरह, महिलाओं में स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए 'मैमोग्राफी' (Mammography) एक विशेष X-Ray जांच है, जो शुरुआती दौर में ही गांठ का पता लगाकर हजारों महिलाओं की जान बचा चुकी है।
वहीं, 'डेक्सा स्कैन' (DEXA Scan / Bone Density Test) के जरिए ऑस्टियोपोरोसिस या हड्डियों के खोखलेपन का समय रहते आकलन किया जाता है। बात अगर 'पेट स्कैन' (PET Scan) की करें, तो यह सामान्य दैनिक जांच नहीं है, बल्कि इसका उपयोग मुख्य रूप से कैंसर के प्रसार और इलाज के प्रभाव की सटीक मैपिंग के लिए किया जाता है।
जांच सिर्फ माध्यम है, इलाज की शुरुआत डॉक्टर के अनुभव सेः
रेडियोलॉजी के जानकारों का मानना है कि कोई भी अनुभवी डॉक्टर केवल रिपोर्ट देखकर इलाज शुरू नहीं करता। मरीज की पूरी केस हिस्ट्री, शारीरिक लक्षण और डॉक्टर का व्यक्तिगत अनुभव ही तय करता है कि किस जांच की आवश्यकता है। इसलिए हर दर्द का इलाज MRI नहीं है और हर बीमारी CT Scan से नहीं पकड़ी जाती। सही और सटीक इलाज महंगी जांचों पर नहीं, बल्कि बीमारी के अनुकूल 'सही जांच' के चयन पर निर्भर करता है।
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