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रीढ़ की हड्डी से लेकर पाचन तक हर समस्या का समाधान है वृश्चिकासन

khaskhabar.com: गुरुवार, 03 सितम्बर 2026 10:22 AM (IST)
रीढ़ की हड्डी से लेकर पाचन तक हर समस्या का समाधान है वृश्चिकासन
नई दिल्ली । शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए योग एक कारगर पद्धति है। यह सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है, जो व्यक्ति को अंदर से शांत, मजबूत और एकाग्र बनाती है। योग के विभिन्न आसनों में वृश्चिकासन खास स्थान रखता है, जिसके अभ्यास से मानसिक संतुलन और शरीर पर नियंत्रण बेहतर करता है। इसका नाम 'वृश्चिक' यानी बिच्छू से लिया गया है, क्योंकि इस आसन के दौरान शरीर की स्थिति बिच्छू के समान होती है। इसके अभ्यास से शारीरिक मजबूती, लचीलापन और मानसिक शांति मिलती है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने वृश्चिकासन को एक उन्नत स्तर का योग आसन बताया है। इसके नियमित रूप से करने से शरीर में शक्ति, संतुलन और लचीलेपन का अद्भभुत संयोजन है। इस आसन में शरीर की आकृति डंक उठाए हुए बिच्छू की तरह हो जाती है।
वृश्चिकासन या स्कॉर्पियन पोज एक इनवर्टेड बैकबेंड आसन है, जिसमें कोहनियों पर संतुलन बनाते हुए पैरों को सिर की ओर झुकाया जाता है। यह आसन कंधों, बाजुओं, पीठ और कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ता है, जिससे कमर दर्द और पीठ की समस्याओं में राहत मिलती है। साथ ही, यह पेट की मांसपेशियों को खींचता है, पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। वृश्चिकासन एकाग्रता और संतुलन भी बढ़ाता है।
यह एक अत्यंत कठिन आसन है। इसे केवल तभी करने का प्रयास करना चाहिए जब आप पिंचा मयूरासन में निपुण हों। हालांकि शुरुआती अभ्यासकर्ता संतुलन बनाने के लिए दीवार के पास अभ्यास करें और हो सके तो किसी योग शिक्षक की देखरेख में ही करें।
वहीं, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, चक्कर आना या गर्दन व पीठ में गंभीर चोट होने पर इस आसन को करने से बचें।
इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है तथा मानसिक एकाग्रता और आत्मविश्वास में भी वृद्धि हो सकती है। हालांकि यह एक कठिन आसन है, इसलिए इसे उचित मार्गदर्शन और सावधानी के साथ करना चाहिए।
--आईएएनएस

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