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'कुछ दर्द दिखाई नहीं देते', जानिए मानसिक पीड़ा से जुड़े 5 बड़े मिथक और उनके तथ्य

यह मानना भी सही नहीं है कि आत्महत्या करने वाला व्यक्ति मरने का पूरी तरह दृढ़ निश्चय कर चुका होता है। आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे कई लोग गहरे भावनात्मक दर्द से राहत चाहते हैं और उनके मन में दुविधा भी हो सकती है। ऐसे समय में समय पर सहायता और उचित हस्तक्षेप महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
एक और भ्रम है कि आत्महत्या हमेशा बिना किसी चेतावनी के होती है। कई मामलों में व्यक्ति पहले से कुछ संकेत दे सकता है, जैसे लगातार निराश रहना, लोगों से दूरी बनाना, चिड़चिड़ापन, व्यवहार में अचानक बदलाव या मृत्यु के बारे में बात करना। इन संकेतों को गंभीरता से लेना जरूरी है।
यह भी जरूरी नहीं कि केवल मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोग ही आत्महत्या करते हैं। मानसिक विकार एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक हो सकते हैं, लेकिन आत्महत्या के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, जैविक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कई कारणों का जटिल मेल हो सकता है।
इसलिए किसी की परेशानी को छोटा न समझें। उसे सुनें, समझें और बिना किसी निर्णय के उसके साथ खड़े रहें। जरूरत महसूस होने पर विशेषज्ञ सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 14416 पर संपर्क किया जा सकता है।
--आईएएनएस
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