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रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है शलभासन, जानिए सही विधि और फायदे

khaskhabar.com: शनिवार, 29 अगस्त 2026 11:59 AM (IST)
रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है शलभासन, जानिए सही विधि और फायदे
नई दिल्ली । योग शरीर और मन को स्वस्थ रखने की एक प्राचीन पद्धति है, जिसके हर आसन का अपना विशेष महत्व है। इन्हीं महत्वपूर्ण आसनों में से एक है शलभासन। यह आसन पीठ, रीढ़ और कोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए बहुत फायदेमंद है। शलभासन करते समय शरीर की मुद्रा 'शलभ,' यानी टिड्डे, जिसे अंग्रेजी में ग्रासहॉपर कहते हैं, के समान होती है। शलभासन रीढ़ की हड्डी की सेहत के लिए बहुत ही अच्छा होता है। यह पीठ के बल लेटकर किया जाने वाला एक बेहद लाभकारी आसन है, जो न सिर्फ रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है बल्कि पाचन तंत्र और मांसपेशियों के लिए भी वरदान माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, शलभासन एक ऐसा योगासन है जिससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और शरीर का वजन नियंत्रित रहता है। इस आसन को नियमित और सही तरीके से करने से पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिलती है। जिन लोगों को हल्का लोअर बैक दर्द या साइटिका जैसी समस्या रहती है, उनके लिए भी यह आसन उपयोगी हो सकता है, हालांकि किसी भी तरह के गंभीर दर्द या चोट की स्थिति में इसे खुद से करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
शलभासन देखने में भले ही आसान लगे, लेकिन इसे करते समय शरीर के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं। इस आसन में पेट के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाने का प्रयास किया जाता है। इससे पीठ और कमर के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। यही वजह है कि इसे बैक स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले योगासनों में शामिल किया जाता है।
शलभासन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अपने हाथों को आगे की ओर फैला दें, हथेलियां ऊपर की ओर और पैर सीधे हों। माथा या ठुड्डी जमीन को छू रही हो। गहरी सांस लें और शरीर को स्थिर करें। सांस छोड़ते हुए दोनों पैरों को एक साथ धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। पैरों को सीधा रखें और घुटनों को न मोड़ें। इसके साथ ही हाथों को भी ऊपर की ओर उठाना है। यह कुछ सुपरमैन पोज जैसा है।
इस स्थिति में 10-30 सेकेंड तक रुकें, सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इसके बाद धीरे-धीरे पैरों और छाती को जमीन पर लाएं और विश्राम करें।
इस आसन को करने के दौरान कुछ सावधानियां भी बरतनी जरूरी है। गर्भावस्था, हर्निया, या पीठ/गर्दन की चोट वाले लोग इसे न करें।
--आईएएनएस

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