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ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि, स्टेम सेल से तैयार किया हृदय वाल्व टिशू

एमसीआरआई की हार्ट रीजेनरेशन ग्रुप की टीम लीडर हॉली वोगेस ने कहा कि यह सफलता क्षतिग्रस्त हृदय वाल्व की मरम्मत के लिए ऐसे उपचार विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिनमें शरीर की अपनी कोशिकाओं का इस्तेमाल किया जा सके।
दुनिया भर में करीब 2.8 करोड़ लोग हृदय वाल्व की बीमारी से पीड़ित हैं। इसके पीछे जन्मजात समस्याएं, संक्रमण और उम्र के साथ वाल्व का कमजोर होना जैसे कई कारण हो सकते हैं। मौजूदा समय में क्षतिग्रस्त वाल्व को दोबारा स्वस्थ करने का कोई ऐसा उपचार नहीं है, जो बीमार को एकदम तंदुरुस्त कर दे। ऐसे में कई मरीजों को वाल्व बदलने की सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है।
इस शोध की खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने तैयार किए गए ऊतक का इस्तेमाल रूमेटिक हार्ट डिजीज (आरएचडी) को समझने के लिए भी किया। जब शोधकर्ताओं ने आरएचडी से जुड़े सूजनकारी प्रोटीन इन ऊतकों के संपर्क में लाए, तो ऊतक कठोर हो गए और उनमें ऐसे जैविक संकेतक दिखाई दिए, जो रोगग्रस्त मानव हृदय वाल्व में पाए जाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में आरएचडी का असर वहां की स्वदेशी आबादी पर अपेक्षाकृत अधिक है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नया प्रयोगशाला मॉडल इस बीमारी को समझने और भविष्य में इसके बेहतर उपचार विकसित करने में मदद कर सकता है।
एमसीआरआई के प्रोफेसर एंजो पोरेल्लो ने कहा कि भविष्य में इसी तकनीक से ऐसे हृदय वाल्व बनाए जा सकते हैं, जो मरीज के शरीर के साथ बढ़ें और बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को ढाल सकें।
अगर यह तकनीक आगे के परीक्षणों में सफल रहती है, तो बच्चों के लिए इसका महत्व और भी बढ़ सकता है। वर्तमान वाल्व प्रत्यारोपण की एक बड़ी चुनौती यह है कि बच्चे के बढ़ने के साथ वाल्व को भी बदलने की जरूरत पड़ सकती है। वैज्ञानिकों की उम्मीद है कि स्टेम सेल से तैयार होने वाले वाल्व इस समस्या का समाधान देने में मदद कर सकते हैं।
--आईएएनएस
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