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शरीर में बहती हैं 5 प्राण ऊर्जाएं, जानिए इनके रंग और काम

समान वायु – गौ-दुग्ध के समान श्वेत होती है। यह शरीर के मध्य भाग, खासकर नाभि और पेट के आसपास सक्रिय मानी जाती है। इसका मुख्य संबंध पाचन और भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों के अवशोषण से है। इसे शरीर में संतुलन बनाए रखने वाली ऊर्जा भी माना जाता है। भोजन को पचाने और उससे ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को इससे जोड़ा जाता है।
उदान वायु पाण्डुर यानी फीका श्वेताभ होती है। इसकी गति ऊपर की ओर मानी जाती है। इसका संबंध मुख्य रूप से कंठ और सिर के क्षेत्र से बताया गया है। बोलने, अपनी बात व्यक्त करने, उत्साह, विकास और विचारों को ऊंचे स्तर तक ले जाने जैसी गतिविधियों से इसे जोड़ा जाता है। इसलिए इसे ऊपर उठाने वाली ऊर्जा के रूप में समझा जा सकता है।
व्यान वायु अग्नि की ज्वाला के समान होती है। इसको पूरे शरीर में फैली हुई ऊर्जा माना जाता है। यह किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे शरीर में इसके संचार की बात कही गई है। रक्त, पोषक तत्वों और तंत्रिका संकेतों के संचार तथा शरीर के विभिन्न हिस्सों के बीच समन्वय से इसे जोड़ा जाता है।
--आईएएनएस
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