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शरीर में बहती हैं 5 प्राण ऊर्जाएं, जानिए इनके रंग और काम

khaskhabar.com: मंगलवार, 15 सितम्बर 2026 10:42 AM (IST)
शरीर में बहती हैं 5 प्राण ऊर्जाएं, जानिए इनके रंग और काम
नई दिल्ली । योग और आयुर्वेद की परंपरा में शरीर को सिर्फ हड्डियों, मांसपेशियों और अंगों का ढांचा नहीं माना गया, बल्कि इसे एक ऐसी सूक्ष्म ऊर्जा प्रणाली के रूप में भी देखा गया है, जिसमें प्राण यानी जीवन ऊर्जा का लगातार प्रवाह होता रहता है। इसी प्राण ऊर्जा को पांच मुख्य भागों में बांटा गया है, जिन्हें पंच प्राण या पंच वायु भी कहा जाता है। माना जाता है कि शरीर की अलग-अलग गतिविधियों को संचालित करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्राण वायु रक्तवर्ण और मणि के समान चमकीला होता है। इसका संबंध मुख्य रूप से छाती और हृदय क्षेत्र से माना जाता है। इसकी गति भीतर की ओर होती है। सांस लेना, ऊर्जा ग्रहण करना और इंद्रियों व मन को सक्रिय बनाए रखना इसके प्रमुख कार्य बताए गए हैं। अपान वायु इंद्रगोप कीट के समान प्रभायुक्त होती है। अपान वायु की गति नीचे की ओर मानी जाती है। इसका स्थान निचले पेट और श्रोणि क्षेत्र में बताया गया है। शरीर से मल-मूत्र और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना, प्रजनन जैसी शारीरिक प्रक्रियाओं से इसका संबंध माना जाता है।
समान वायु – गौ-दुग्ध के समान श्वेत होती है। यह शरीर के मध्य भाग, खासकर नाभि और पेट के आसपास सक्रिय मानी जाती है। इसका मुख्य संबंध पाचन और भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों के अवशोषण से है। इसे शरीर में संतुलन बनाए रखने वाली ऊर्जा भी माना जाता है। भोजन को पचाने और उससे ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को इससे जोड़ा जाता है।
उदान वायु पाण्डुर यानी फीका श्वेताभ होती है। इसकी गति ऊपर की ओर मानी जाती है। इसका संबंध मुख्य रूप से कंठ और सिर के क्षेत्र से बताया गया है। बोलने, अपनी बात व्यक्त करने, उत्साह, विकास और विचारों को ऊंचे स्तर तक ले जाने जैसी गतिविधियों से इसे जोड़ा जाता है। इसलिए इसे ऊपर उठाने वाली ऊर्जा के रूप में समझा जा सकता है।
व्यान वायु अग्नि की ज्वाला के समान होती है। इसको पूरे शरीर में फैली हुई ऊर्जा माना जाता है। यह किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे शरीर में इसके संचार की बात कही गई है। रक्त, पोषक तत्वों और तंत्रिका संकेतों के संचार तथा शरीर के विभिन्न हिस्सों के बीच समन्वय से इसे जोड़ा जाता है।
--आईएएनएस

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