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किशोरावस्था में व्यायाम से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम: नई स्टडी में खुलासा

सप्ताह में 2 घंटे या अधिक आरपीए करने वाली लड़कियों में ब्रेस्ट में पानी की मात्रा कम और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम पाया गया।
अध्ययन से इस बात पर नई रोशनी पड़ती है कि किशोरावस्था के दौरान शारीरिक गतिविधि—जो ब्रेस्ट डेवलपमेंट का एक अहम समय होता है—भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से जुड़े बायोलॉजिकल तरीकों को कैसे प्रभावित कर सकती है।
शोधकर्ता रेबेका केहम ने कहा कि यह स्टडी आरपीए को ब्रेस्ट कैंसर रिस्क के जैविक पाथवे से जोड़ती है, जो भविष्य में जोखिम कम करने के लिए नीतियां बनाने में मदद करेगी।
केहम ने आगे कहा, "हमारे नतीजों से पता चलता है कि मनोरंजक रीक्रिएशनल फिजिकल एक्टिविटी का संबंध किशोर लड़कियों में ब्रेस्ट टिश्यू की बनावट और स्ट्रेस बायोमार्कर में बदलाव से है, जो बॉडी फैट से अलग है, जिसका ब्रेस्ट कैंसर पर असर हो सकता है।"
यह स्टडी वयस्क महिलाओं पर पहले की गई रिसर्च से मेल खाती है, जिसमें दिखाया गया है कि ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी का संबंध कम मैमोग्राफिक ब्रेस्ट डेंसिटी से है, जो ब्रेस्ट कैंसर के खतरे का एक मुख्य संकेत है।
किशोरावस्था के दौरान, प्रतिभागियों ने बीते एक हफ्ते में की गई शारीरिक गतिविधियों पर बात की, जिसमें संगठित और असंगठित दोनों तरह की गतिविधियां शामिल थीं। इन्होंने क्लिनिक विजिट पूरी कीं, जिसमें खून और यूरिन के सैंपल लेने के साथ-साथ ब्रेस्ट टिश्यू का असेसमेंट भी शामिल था।
इस स्टडी में लड़कियों की औसत उम्र 16 साल थी। आधे से अधिक (51 प्रतिशत) ने बीते हफ्ते कोई मनोरंजक शारीरिक गतिविधि न करने की बात कही। तिहत्तर प्रतिशत ने संगठित गतिविधियों में कोई हिस्सा नहीं लिया, और 66 प्रतिशत ने असंगठित गतिविधियों में कोई हिस्सा नहीं लिया।
सुसान जी. कोमेन फाउंडेशन के अनुसार, बचपन और किशोरावस्था में सक्रिय महिलाओं में बाद में जोखिम कम होता है।
यह खोज स्वास्थ्य नीतियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिखाती है कि स्कूलों में खेल-कूद को बढ़ावा देकर ब्रेस्ट कैंसर को रोका जा सकता है।
--आईएएनएस
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