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हर मच्छर का अपना 'फेवरेट' इंसान! 119 लोगों पर हुई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

दरअसल इंसानी शरीर से एक हजार से ज्यादा तरह के वाष्पशील कार्बनिक यौगिक निकल सकते हैं। इनमें से कई के बारे में वैज्ञानिक अभी पूरी तरह नहीं जानते। यही रसायन हमारी प्राकृतिक गंध का हिस्सा बनते हैं और मच्छरों के लिए किसी तरह के संकेत का काम कर सकते हैं।
स्टडी में सामने आया कि एडीज एजिप्टी ऐसे लोगों की ओर ज्यादा आकर्षित हुआ, जिनकी त्वचा में कुछ खास वाष्पशील रसायन कम मात्रा में थे और जो शरीर पर कोई अतिरिक्त खुशबू नहीं लगा रहे थे। इस प्रजाति ने पुरुषों की तरफ हल्की ज्यादा पसंद भी दिखाई। यह मच्छर दिन के समय ज्यादा सक्रिय रहता है।
वहीं एडीज एल्बोपिक्टस, जिसे एशियन टाइगर मच्छर भी कहा जाता है, त्वचा से प्राकृतिक रूप से निकलने वाले कुछ खास केटोन्स और पौधों जैसी गंध वाले रसायनों की ओर ज्यादा आकर्षित हुआ। यह भी दिन में सक्रिय रहने वाली प्रजाति है।
तीसरी प्रजाति क्यूलेक्स क्विनक्वेफैसिएटस की पसंद और भी अलग निकली। यह मच्छर आमतौर पर रात में ज्यादा सक्रिय होता है और इंसान की त्वचा पर मौजूद माइक्रोबायोम यानी बैक्टीरिया, फंगस और दूसरे सूक्ष्मजीवों के समुदाय को पहचानने पर ज्यादा निर्भर करता है।
हमारी त्वचा पर हमेशा लाखों-करोड़ों सूक्ष्मजीव मौजूद रहते हैं। ये माइक्रोब्स हमारी त्वचा की गंध को प्रभावित करते हैं। स्टडी में पाया गया कि कुछ बैक्टीरियल परिवार मच्छरों को इंसान की तरफ आने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, जबकि कुछ दूसरे बैक्टीरिया उन्हें दूर रखने वाले संकेत दे सकते हैं।
बता दें कि यह अध्ययन वैज्ञानिक जर्नल आईसाइंस में प्रकाशित हुआ है। शोध टीम का नेतृत्व एफआईयू के न्यूरोजेनेटिसिस्ट मैथ्यू डीगेनारो कर रहे थे, जबकि इस रिसर्च की अगुवाई पीएचडी छात्रा कायली मारेरो ने की। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसके नतीजे भविष्य में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के नए तरीके विकसित करने में मदद कर सकते हैं।
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