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घर का खाना खाने के बाद भी बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल, इन वजहों को न करें नजरअंदाज

घर का खाना पौष्टिक होता है, लेकिन उसमें इस्तेमाल होने वाली चीजों की मात्रा भी मायने रखती है। घी, मक्खन, मलाई और कुछ दूसरे पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है। इनका जरूरत से ज्यादा सेवन एलडीएल को बढ़ा सकता है। इसलिए खाना बनाते समय कुल फैट और उसकी गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना चाहिए।
पूरी, पकौड़े, कचौड़ी या दूसरे डीप-फ्राइड व्यंजन अगर कभी-कभार खाए जाएं तो बात अलग है, लेकिन इन्हें रोज के भोजन का हिस्सा बनाना वजन और हृदय स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। अगर इसके साथ आप दिनभर कम चलते-फिरते हैं, तो वजन बढ़ने की संभावना भी बढ़ सकती है। इसलिए खाना घर का है या बाहर का, इसके साथ यह भी देखना जरूरी है कि उसे किस तरह बनाया गया है और कितनी मात्रा में खाया जा रहा है।
कोलेस्ट्रॉल को ठीक रखने के लिए सिर्फ तेल कम करना काफी नहीं है। खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, ओट्स, जौ, बीन्स और दाल जैसी चीजें भी होनी चाहिए। इनमें फाइबर पाया जाता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। अगर आपकी रोज की थाली में सब्जियां और फल बहुत कम हैं और मैदा, सफेद ब्रेड, बिस्किट या दूसरे पैकेट वाले खाने की मात्रा ज्यादा है, तो डाइट संतुलित नहीं मानी जाती।
आपका खाना घर का है लेकिन अगर दिन का ज्यादातर समय बैठे हुए गुजरता है तो सिर्फ डाइट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि वजन को नियंत्रित रखने और हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करती है। तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी गतिविधियां रोज की दिनचर्या में शामिल की जा सकती हैं।
--आईएएनएस
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