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कमर दर्द और गर्दन की अकड़न से हैं परेशान; रोज करें ये योगासन, रीढ़ रहेगी मजबूत

अर्ध चक्रासन - आयुष मंत्रालय के अनुसार, अर्ध चक्रासन (हाफ व्हील पोज) एक बेहतरीन बैकबेंडिंग (पीछे की ओर झुकने वाला) योगासन है, जो रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन और फेफड़ों की कार्यप्रणाली में सुधार करने में अत्यधिक प्रभावी है। इस आसन को करने के दौरान शरीर पीछे की ओर झुकता है, जिससे रीढ़ की हड्डी पर सकारात्मक दबाव पड़ता है और लचीलापन सुधरता है।
त्रिकोणासन - त्रिकोणासन रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन और मजबूती के लिए बेहद प्रभावकारी योग आसन है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को दोनों तरफ एक बेहतरीन खिंचाव देता है, जिससे पीठ का दर्द कम होता है और शारीरिक मुद्रा में सुधार होता है।
मार्जारीआसन - यह रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाने वाला एक बेहद सरल और असरदार योगासन है। एक्सपर्ट बताते हैं कि रोजाना कुछ मिनट मार्जरी आसन को करने से दर्द से निजात पाया जा सकता है। इस आसन को करने के दौरान शरीर बिल्ली की मुद्रा में होता है। इसको करते समय रीढ़ की हड्डी को आगे-पीछे लहर की तरह हिलाया जाता है, जिससे पूरा स्पाइन लचीला और मजबूत बनता है।
वक्रासन- इस आसन को रीढ़ की हड्डी और कमर के लिए उपयोगी माना जाता है। इसका नियमित अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कमर और कंधों में होने वाले खिंचाव और दर्द से राहत पाने में भी यह उपयोगी माना जाता है। खासकर लंबे समय तक बैठने वाले लोगों के लिए यह आसन शरीर को स्ट्रेच करने का अच्छा तरीका हो सकता है।
अर्ध उष्ट्रासन - दफ्तर में लगातार सिस्टम के आगे झुककर बैठने से रीढ़ की हड्डी में कड़ापन आ जाता है। यह आसन रीढ़ को पीछे की तरफ मोड़कर उसके स्वाभाविक लचीलेपन को वापस लाता है। इसके नियमित अभ्यास से कंधे झुकने की समस्या दूर होती है और शरीर की मुद्रा सुधरती है।
शशकासन - इस आसन को करने के दौरान रीढ़ की हड्डी पर खिंचाव पड़ता है और लचीलापन आता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से आपको पीठ की समस्याओं में आराम मिलता है। इसके नियमित करने से पेट के निचले हिस्से में रक्त प्रवाह और भी तेज हो जाता है।
भुजंगासन - यह आसन पीठ के निचले हिस्से और रीढ़ के साथ चलने वाली मांसपेशियों को सक्रिय और मजबूत करता है। इस योगासन से रीढ़ की हड्डी के आसपास की तंत्रिकाओं और रक्त वाहिकाओं में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है।
सेतुबंधासन - इस आसन को ब्रिज पोज भी कहा जाता है, जो रीढ़ की हड्डी को मजबूत, लचीला और तनावमुक्त बनाने में मदद करता है। इस आसन को करने के दौरान जब कूल्हों को ऊपर उठाते हैं, तो पीठ और रीढ़ की निचली मांसपेशियों (लोअर बैक) पर दबाव पड़ता है, जिससे वे मजबूत होती हैं।
अर्ध हलासन - अर्ध हलासन (हाफ हलासन) पीठ के बल लेटकर पैरों को 90 डिग्री के कोण पर ऊपर उठाने से रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से (लंबर क्षेत्र) को जमीन पर सपाट रखकर उसे स्थिरता और मजबूती प्रदान करता है।
--आईएएनएस
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