कहीं आप भी तो नहीं खा रहे सीधा क्रीम से बना घी, जानें क्या कहता है आयुर्वेद

प्राकृतिक तरीके से बनाए गए घी को मटके में धीमी आंच पर पकाने की परंपरा रही है, जिससे घी में केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि पाचन में आसानी और शरीर के लिए बलवर्धक रहा है। प्राकृतिक तरीके से बनाए गए घी को बनाने से पहले दूध को दही के रूप में जमाया जाता है, जो उसके गुणों में वृद्धि करता है। दही में मौजूद प्राकृतिक जीवाणु दही को पौष्टिक और पाचन में आसान बनाते हैं, और उससे निकले मक्खन में वही सारे गुण होते हैं।
प्राकृतिक तरीके से बना घी पाचन में आसान होता है, पाचन अग्नि को भी संतुलित करता है, धातुओं को पोषण देता है, और शरीर का ओज भी बरकरार रखता है। वहीं, सीधा मलाई या क्रीम से बनाए गए घी में दही जमाने वाला चरण नहीं होता है, जिससे घी की गुणवत्ता कम होती है। सीधे क्रीम से घी निकालने पर हाथ में घी नहीं, प्योर वसा आती है। इसका सेवन करने से सिर्फ मोटापा और बीमारी ही मिलती है।
--आईएएनएस
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