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ख़राब पेट से मानसिक तनाव हमारा जीवन बर्बाद

पेट से डिप्रेशन का संबंध क्यों और कैसे?सेरोटोनिन (Serotonin) का निर्माण: शरीर का लगभग 90% सेरोटोनिन (मूड सही रखने वाला 'हैप्पी हार्मोन') पेट में बनता है।
पेट के बैक्टीरिया (Gut Microbiome): पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखते हैं। जब ये खराब होते हैं, तो दिमाग पर बुरा असर पड़ता है।
वैगस नर्व (Vagus Nerve): यह मुख्य नस पेट और दिमाग को सीधे जोड़ती है और पेट की स्थिति के संकेत दिमाग तक पहुँचाती है।
मुख्य कारण
खराब खान-पान: अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और चीनी का सेवन।
एंटीबायोटिक्स का ज्यादा इस्तेमाल: इससे पेट के अच्छे बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं।
क्रॉनिक स्ट्रेस (लगातार तनाव): तनाव से पेट का पाचन बिगड़ता है, जो बदले में मानसिक स्थिति को और खराब करता है।
इससे होने वाली बीमारियां व समस्याएं
मानसिक बीमारियां: एंग्जायटी (चिंता), गंभीर डिप्रेशन और मूड स्विंग्स।
पाचन विकार: इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम (IBS), एसिडिटी, कब्ज और पुरानी सूजन (Inflammation)।
कमजोर इम्युनिटी: बार-बार बीमार पड़ना और थकान महसूस होना।
बचाव और रोकथाम
प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स लें: दही, छाछ, फर्मेंटेड खाना, फल और हरी सब्जियां पेट के बैक्टीरिया को दुरुस्त रखती हैं।
जंक फूड से दूरी: रिफाइंड शुगर, मैदा और अत्यधिक तले-भुने खाने से बचें।
सक्रिय दिनचर्या: रोजाना 30 मिनट वॉक या योग करें और 7–8 घंटे की पूरी नींद लें।
(ध्यान दें: यदि डिप्रेशन के लक्षण गंभीर हों, तो मनोचिकित्सक या डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।)
डॉक्टर हिमांशु वशिष्ट।पुनर्वास विशेषज्ञ
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