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जुबीन गर्ग मौत मामला: असम एसोसिएशन के सदस्य ने कोर्ट में दर्ज कराया बयान, सितंबर 2025 में यॉट पर थे मौजूद

जुबीन गर्ग की मौत की खबर सामने आने के बाद असम में काफी दुख और गुस्सा देखने को मिला था। उनकी मौत को लेकर कई जगह प्रदर्शन हुए और पुलिस में कई शिकायतें दर्ज कराई गईं। इसके बाद असम पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। राज्य में दर्ज 60 से ज्यादा एफआईआर को बाद में एक साथ जोड़कर सीआईडी को सौंप दिया गया।
जांच के बाद एसआईटी ने दिसंबर 2025 में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इसमें कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के आयोजक श्यामकानु महंत, जुबीन के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, उनके बैंड के साथी शेखर ज्योति गोस्वामी और सिंगर अमृतप्रभा महंत पर हत्या के आरोप लगाए गए हैं।
इसके अलावा, जुबीन गर्ग के कजिन संदीपन गर्ग और उनके निजी सुरक्षा कर्मी नंदेश्वर बोरा तथा प्रबीन बैश्य को भी आरोपी बनाया गया। हालांकि मामले में लगाए गए आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं और इन पर अंतिम फैसला आना बाकी है।
मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करने के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इस साल मार्च में एक अलग फास्ट-ट्रैक सेशन कोर्ट का गठन किया था। इस कोर्ट में मामले की रोजाना सुनवाई की जा रही है। मई में सभी सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए, जिसके बाद मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी।
मामले में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया 8 जून से शुरू हुई थी। इसके बाद लगातार गवाहों से पूछताछ की जा रही है। 14 अगस्त तक अभियोजन पक्ष मामले में सूचीबद्ध कुल 394 गवाहों में से 94 के बयान दर्ज कर चुका था। इनमें सिंगापुर से जुड़े कई गवाह भी शामिल हैं, जिनकी गवाही अभी बाकी है।
सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट ने इस साल मार्च में जुबीन गर्ग की मौत को डूबने से हुई मौत माना था। वहां की जांच में किसी तरह की साजिश या बाहरी वजह के सबूत नहीं पाए गए थे और फाउल प्ले की संभावना को खारिज कर दिया गया था। हालांकि भारत में चल रही सुनवाई का दायरा उन आरोपों और परिस्थितियों से जुड़ा है, जो जुबीन की मौत के पूरे मामले को लेकर सामने आए हैं।
वहीं, जुबीन गर्ग मौत मामले की सुनवाई को जल्द पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी असम सरकार से तेजी लाने की अपील कर चुका है। ऐसे में परीक्षित शर्मा का कोर्ट में पेश होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि वह उस यॉट पर मौजूद थे, जहां जुबीन की मौत हुई थी।
इस मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी असम सरकार को तेजी लाने का निर्देश दे चुका है। ऐसे में परीक्षित शर्मा की गवाही अहम मानी जा रही है।
--आईएएनएस
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