Sandeepa Dhar has a long-standing connection with Kashmir, and she shared emotional memories along with pictures.-m.khaskhabar.com
×
khaskhabar
Jan 20, 2026 10:55 am
Location
 
   राजस्थान, हरियाणा और पंजाब सरकार से विज्ञापनों के लिए मान्यता प्राप्त
Advertisement

कश्मीर से संदीपा धर का है पुराना नाता, तस्वीरों के साथ साझा कीं भावुक यादें

khaskhabar.com: गुरुवार, 11 दिसम्बर 2025 3:19 PM (IST)
कश्मीर से संदीपा धर का है पुराना नाता, तस्वीरों के साथ साझा कीं भावुक यादें
श्रीनगर। एक्टर संदीपा धर ने हाल ही में अपनी कश्मीर यात्रा का बेहद भावुक यादें साझा करते हुए उस जगह के बारे में भी बताया, जहाँ कभी उनका परिवार रहता था, और फिर वहां से निकलने के बाद फिर कभी वे वापस लौट ही नहीं पाए। बचपन से अपने माता-पिता की कहानियों और पुरानी तस्वीरों के ज़रिए जिस कश्मीर को वह जानती थीं, इस बार उसका सजीव अनुभव उनके लिए अपनी पहचान के साथ अपनी यादों और अपनेपन की गहरी खोज बन गई। अपनी पोस्ट में अपना हाल-ए-दिल बयां करते हुए उन्होंने लिखा है, “कश्मीर… एक ऐसा घर, जिसे मैंने सिर्फ अपने माता-पिता की कहानियों और फीकी पड़ चुकी तस्वीरों के ज़रिए जाना था।" पोस्ट में साझा की गई तस्वीरों में संदीपा उसी विशाल पेड़ के नीचे खड़ी हैं, जिसके नीचे कभी उनका परिवार पिकनिक मनाया करता था। वे उस घर को भी देख रही हैं, जिसे उनके माता-पिता ने “सोना बेचकर और हर बची हुई कमाई जोड़कर, ईंट–ईंट लगाकर बनाया था।” संदीपा ने माता खीर भवानी मंदिर में भी प्रार्थना की, जहाँ उनका परिवार हर हफ्ते जाया करता था, तब तक… जब तक उन्हें सब कुछ छोड़कर जाना नहीं पड़ा। इस यात्रा को और भी खास बनाता है यह तथ्य कि उनके माता-पिता भी दशकों बाद इन पवित्र जगहों पर लौटे, अपने उन स्मृतियों को फिर से जीवित करते हुए जो उनके जीवन के सबसे बड़े अध्यायों में से थे।
संदीपा के लिए यह अपने परिवार की यादों में सीधे कदम रखने जैसा अनुभव रहा। उनकी यात्रा कश्मीर के कई प्रतीकात्मक स्थलों से भी होकर गुज़री, जिनमें नगीन झील, चश्मे शाही, निशात गार्डन, पहलगाम और गुलमर्ग शामिल है। उन्होंने यह भी लिखा है, “मैंने नगीन झील पर शिकारा चलाया, चश्मे शाही का मीठा झरने का पानी पिया, और निशात गार्डन, पहलगाम और गुलमर्ग में घूमी… वे जगहें जो मेरे परिवार की यादों में तीस साल से ज़िंदा थीं।" हालाँकि जगहें समय के साथ बदल चुकी हैं लेकिन संदीपा के अनुसार भावनाओं की डोर वैसी ही है।
उन्होंने लिखा है, “सब कुछ बदल गया है और फिर भी कुछ नहीं बदला। बागान अब उतने भरे नहीं, घर खाली खड़ा है… पर अजीब तरह से लगा कि मैं हमेशा से यहीं की हूँ।” अपनी सबसे गहरी भावनाओं को व्यक्त करते हुए उन्होंने आगे लिखा है, “यह अजीब है कि एक जगह जिसे आप मुश्किल से जानते हों, वह आपके हिस्से अपने भीतर संभाले रखे। पता नहीं मैं फिर कब लौटूंगी, पर इन चंद दिनों में अपने परिवार के अतीत के बीच रहना ऐसा था जैसे किसी ऐसे घर लौट आई हूँ, जिसकी कमी मुझे अभी तक समझ ही नहीं आई थी।”
संदीपा धर के लिए कश्मीर की यह यात्रा सिर्फ एक होमकमिंग नहीं थी, बल्कि अपने इतिहास, अपनी जड़ों और उस पहचान को फिर से छू लेने का अनुभव थी, जो वर्षों और दूरी के पार उनका इंतज़ार कर रही थी।

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

Advertisement
Khaskhabar.com Facebook Page:
Advertisement