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हंसते-हंसाते समाज का सच दिखाना ज्यादा असरदार : माधुरी दीक्षित

अभिनेत्री ने आगे कहा, ''किसी बात को बार-बार समझाने या उपदेश देने से लोग कई बार दूरी बना लेते हैं। लेकिन, जब वही बात मजेदार और दिलचस्प तरीके से दिखाई जाती है, तो लोग उसे ध्यान से देखते हैं और उस पर सोचते भी हैं। फिल्मों और कहानियों की यही सबसे बड़ी ताकत है। मुझे ऐसी कहानियां पसंद हैं, जिनमें मनोरंजन भी हो और कोई अच्छा संदेश भी छिपा हो।''
इसके अलावा, माधुरी ने समाज में महिलाओं और पुरुषों के प्रति अलग-अलग नजरिए की बात करते हुए पितृसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाया।
माधुरी ने कहा, "यह एक पितृसत्तात्मक समाज है जो प्यार और रिश्तों के मामलों में आज भी दोहरे मापदंड अपनाता हुआ आया है। अगर कोई पुरुष गर्लफ्रेंड बनाता है तो उसे रोमियो कहा जाता है, लेकिन अगर कोई महिला वैसा ही करती है तो उसे बुरा-भला कहा जाता है और नकारात्मक नजरिए से देखा जाता है।"
अभिनेत्री ने कहा, ''मेरी फिल्म 'मां बहन' इन्हीं पुरानी परंपराओं और नियमों को चुनौती देती है। फिल्म में महिलाओं को मजबूत और पारंपरिक नियमों को तोड़ने वाला किरदार दिया गया है। हर महिला सम्मान और गरिमा के साथ जीने की हकदार है।''
'मां बहन' का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है। फिल्म में माधुरी के साथ तृप्ति डिमरी, धारणा दुर्गा, रवि किशन, गीतांजलि कुलकर्णी, अरुणोदय सिंह और शार्दुल भारद्वाज भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है।
--आईएएनएस
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