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'धुरंधर' में अपने किरदार पर राकेश बेदी ने की बात, कहा-असल चुनौती सीन फिल्माने में होती है

अपने किरदार की चुनौतियों पर बात करते हुए अभिनेता ने कहा कि असली चुनौती शूटिंग के दौरान सीन करने में होती है। किसी भी सीन को अच्छे से करने के लिए सबसे पहले सहज होना जरूरी होता है।
राकेश बेदी अपनी कॉमेडी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने हमेशा अपने हास्य किरदारों से फैंस का दिल जीता है। अब आज की कॉमेडी और पहले की क्लासिक कॉमेडी पर बात करते हुए अभिनेता राकेश बेदी ने कहा कि फिल्म 'चुपके चुपके', 'चश्मे बद्दूर', 'चलती का नाम गाड़ी', या 'पड़ोसन' जैसी क्लासिक फिल्में देखें, तो ये सच्ची कॉमेडी फिल्में थीं जो किसी खास कॉमेडियन पर निर्भर नहीं थीं। हर किरदार में ह्यूमर था। हमारे देश में, हर दशक में औसतन लगभग एक प्योर कॉमेडी फिल्म बनती है। आज, दो सीरियल हैं 'भाभी जी घर पर हैं' और 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा', जो नेचुरल ह्यूमर बनाए रखते हैं। इत्तेफाक से मैं दोनों का हिस्सा रहा हूं। वे लंबे समय तक चले हैं क्योंकि उनका ह्यूमर ऑर्गेनिक है।
अपने अब तक के करियर के बारे में बात करते हुए अभिनेता ने कहा कि मुझे हमेशा लगता है कि मैंने अभी तक काफी कुछ नहीं किया है। अगर किसी को लगने लगे कि उसने सब कुछ पा लिया है, तो तुरंत ठहराव आ जाता है। एक एक्टर सफर का मजा तभी लेता है जब उसे लगता है कि अभी बहुत कुछ करना बाकी है।
अभिनेता ने अभी तक पर्दे पर गुदगुदाने वाले किरदार निभाए हैं। पहली बार 'धुरंधर' में सीरियस रोल निभाने पर उन्होंने कहा कि ये मेरे लिए मुश्किल नहीं है क्योंकि मैंने असल जिंदगी में ऐसे लोगों को देखा है। मुझे पहले ऐसे रोल के साथ एक्सपेरिमेंट करने का मौका न मिला हो, लेकिन थिएटर ने मुझे वह आजादी दी है। मैंने कई तरह के किरदार निभाए हैं, जिनमें नेगेटिव किरदार भी शामिल हैं, इसलिए यह रोल मेरे लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं था।
--आईएएनएस
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