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डिजिटल क्रिएशन पर बोलीं प्राजक्ता कोली- यहां कोई रोडमैप नहीं, रोलरकोस्टर है

क्रिएटर बनने की जर्नी को उन्होंने पूरी तरह अनप्रेडिक्टेबल बताया। प्राजक्ता ने कहा, “इस इंडस्ट्री में कोई तय रोडमैप या ब्लूप्रिंट नहीं होता। यह एक रोलरकोस्टर राइड है। कभी लगता है कि तीन-चार अच्छे वीडियो बन गए, जिंदगी सेट हो गई। फिर पांचवां वीडियो आते-आते सब बदल जाता है। इस पागलपन में कोई पैटर्न नहीं, कोई रिदम नहीं। सब कुछ खुद ही करना पड़ता है।”
उन्होंने यह भी माना कि पिछले दस साल में उनकी सबसे बड़ी सीख यही रही है कि बदलाव को जल्दी अपनाना जरूरी है। उन्होंने बताया, “मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण रहा यह समझना कि इस समय कौन-सी चीज चल रही है, कौन सी चलनी बंद हो गई और फिर बिना रुके अगली चीज की तरफ बढ़ जाना।"
प्राजक्ता का मानना है कि डिजिटल स्पेस का सफर जितना चुनौतीपूर्ण है, उतना ही रोमांचक भी है। ‘मोस्टलीसेन’ चैनल से मशहूर हुईं प्राजक्ता ‘मिस्मैच्ड’ और ‘जुग जुग जीयो’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में भी नजर आ चुकी हैं।
--आईएएनएस
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