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पंकज त्रिपाठी बर्थडे स्पेशल : जानें एक्टिंग से पहले क्या करते थे अभिनेता, सिर्फ 10 रुपए से मुंबई में कैसे किया गुजारा?

एक इंटरव्यू में पंकज त्रिपाठी ने खुद बताया था कि उस दौर में उनकी कमाई का एक बड़ा सहारा होटल की नौकरी थी। उनके पास महंगे एक्टिंग स्कूल में जाने के लिए पैसे नहीं थे। उनका लक्ष्य नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में दाखिला लेना था। उन्होंने एनएसडी की परीक्षा कई बार दी और आखिरकार 2001 में उनका चयन हुआ। 2004 में एनएसडी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मुंबई पहुंचे। यहां भी शुरुआत आसान नहीं थी। वह 16 अक्टूबर 2004 को मुंबई आए थे और उनके पास करीब 46 हजार रुपए थे। लेकिन, कुछ ही समय बाद उनके पास सिर्फ 10 रुपए बचे थे।
मुंबई में पंकज ने छोटे-छोटे रोल से शुरुआत की। 'रन', 'अपहरण', 'ओमकारा', 'शौर्य', 'रावण' और 'अग्निपथ' जैसी फिल्मों में उन्हें छोटे किरदार मिले। उन्होंने टीवी पर भी काम किया और कई धारावाहिकों का हिस्सा बने। साल 2012 में 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' ने पंकज त्रिपाठी को बड़ी पहचान दी। उनके अभिनय ने दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री दोनों का ध्यान खींचा। इसके बाद 'फुकरे', 'मसान', 'निल बट्टे सन्नाटा', 'बरेली की बर्फी', 'स्त्री' और 'लूडो' जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। वेब सीरीज 'मिर्जापुर' और 'क्रिमिनल जस्टिस' ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया।
पंकज ने खुद को एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रखा। कभी वह गंभीर भूमिका में दिखे, कभी खतरनाक किरदार में और कभी ऐसे आम आदमी के रूप में, जिससे दर्शक तुरंत जुड़ गए। 'न्यूटन' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 'मिमी' में उनके अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का सम्मान मिला। उनके खाते में दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हैं।
--आईएएनएस
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