Mayuri Kango: After leaving IIT, she became a national crush in the 90s, saying goodbye to films and becoming a major figure in the corporate world.-m.khaskhabar.com
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मयूरी कांगो : आईआईटी छोड़ 90 के दशक में बनीं नेशनल क्रश, फिल्मों को अलविदा कह बनीं कॉरपोरेट दुनिया में बड़ी शख्सियत

khaskhabar.com: शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 12:14 PM (IST)
मयूरी कांगो : आईआईटी छोड़ 90 के दशक में बनीं नेशनल क्रश, फिल्मों को अलविदा कह बनीं कॉरपोरेट दुनिया में बड़ी शख्सियत
मुंबई । अक्सर लोग नौकरी छोड़कर फिल्मी दुनिया में नाम और शोहरत कमाने का सपना देखते हैं, लेकिन मयूरी कांगो की कहानी इससे बिल्कुल अलग है। महज 15 साल की उम्र में आईआईटी कानपुर की प्रवेश परीक्षा पास करने वाली मयूरी ने पढ़ाई छोड़कर अभिनय को चुना और 90 के दशक में अपनी मासूम छवि व शानदार अभिनय से लाखों दिलों की धड़कन बन गईं। हालांकि, जब उनका करियर सफलता की ऊंचाइयों पर था, तब उन्होंने ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कहकर एक नया रास्ता अपनाने का फैसला किया। उनकी यह यात्रा बताती है कि सफलता सिर्फ फिल्मों में नहीं, बल्कि जीवन में अपनी पसंद के रास्ते चुनने में भी होती है। आज, वह दुनिया की अग्रणी तकनीकी और विज्ञापन कंपनियों में शीर्ष नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। मयूरी कांगो का जन्म 15 अगस्त 1982 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) में हुआ था। उनके पिता भालचंद्र कांगो एक राजनेता थे और उनकी माता सुजाता कांगो एक प्रसिद्ध थिएटर कलाकार थीं। एक सुशिक्षित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पारिवारिक पृष्ठभूमि ने मयूरी कांगो के बौद्धिक और कलात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षा के प्रति उनके गहरे रुझान का प्रमाण यह था कि उन्होंने अपनी किशोरावस्था में ही आईआईटी प्रवेश परीक्षा पास कर ली थी, हालांकि नियति ने उनके लिए एक अलग ही मार्ग निर्धारित किया था। जब वह अपनी मां के साथ मुंबई के एक शूट पर गई थीं तो प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सईद अख्तर मिर्जा की नजर उन पर पड़ी। सईद अख्तर मिर्जा ने उन्हें बाबरी मस्जिद विध्वंस की पृष्ठभूमि पर आधारित अपनी फिल्म 'नसीम' (1995) में मुख्य भूमिका का प्रस्ताव दिया। शिक्षा और कला के बीच एक रणनीतिक निर्णय लेते हुए उन्होंने फिल्म को चुना और इस प्रकार उनके अभिनय करियर की शुरुआत हुई।
'नसीम' में उनके संवेदनशील और परिपक्व अभिनय ने फिल्म उद्योग के दिग्गजों का ध्यान आकर्षित किया। जाने-माने निर्देशक महेश भट्ट ने इस प्रदर्शन से प्रभावित होकर उन्हें अपनी रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'पापा कहते हैं' (1996) में जुगल हंसराज के विपरीत कास्ट किया। इस फिल्म का संगीत विशेष रूप से अत्यधिक लोकप्रिय हुआ। जावेद अख्तर द्वारा लिखित और उदित नारायण द्वारा गाया गया गीत 'घर से निकलते ही' 90 के दशक के युवाओं के लिए एक लव एंथम बन गया।
इस सफलता के बाद उन्होंने कई प्रमुख फिल्मों में काम किया। 1997 की 'बेताबी' फ्लॉप हुई। 1999 में 'होगी प्यार की जीत' सेमी-हिट रही और साल 2000 में आई फिल्म 'बादल' हिट रही। एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'बादल' में मयूरी कांगो ने 'सोनी' नाम की एक सहायक भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में बॉबी देओल और रानी मुखर्जी नजर आए थे।
लगभग 16 फिल्मों (जिनमें से आधी रिलीज भी नहीं हो सकीं) और कई टेलीविजन धारावाहिकों (जैसे 'डॉलर बहू' और 'कारिश्मा: द मिरेकल्स ऑफ डेस्टिनी') में काम करने के बाद मयूरी कांगो ने 28 दिसंबर, 2003 को एक एनआरआई व्यवसायी आदित्य ढिल्लों से शादी की और संयुक्त राज्य अमेरिका चली गईं। अमेरिका में उन्होंने सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू यॉर्क से मार्केटिंग और फाइनेंस में एमबीए की डिग्री हासिल की और 2007 में स्नातक की। यह कदम उनके पेशेवर पुनर्जागरण की नींव साबित हुआ।
अपनी व्यावसायिक कुशाग्रता से उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग और विज्ञापन के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। 2007 में 360आई न्यूयॉर्क में एसोसिएट मीडिया मैनेजर के रूप में करियर शुरू किया। 2012 में 'जेनिथ' भारत के चीफ डिजिटल ऑफिसर बनीं। 2016 में 'पर्फोर्मिक्स' के मैनेजिंग डायरेक्टर और 2019 में गूगल इंडिया में इंडस्ट्री हेड- एजेंसी पार्टनरशिप बनीं।
मौजूदा समय में वह सीईओ की भूमिका में भारत के ऑपरेशन्स के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर मीडिया, टेक और एआई समाधानों को आकार दे रही हैं।
--आईएएनएस

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