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'खुदा से पूछूं, क्या हम और यूसुफ हमेशा के लिए नहीं मिल सकते', दिलीप कुमार की जयंती पर भावुक हुईं सायरा बानो

उन्होंने सोशल मीडिया पर उन्हें याद कर लिखा, ''मेरे प्रिय यूसुफ साहब, हर साल, जब यह दिन आता है, तो मेरे दिल में एक कोमल सी हलचल उठती है, उन सभी पलों के लिए, जब मैंने आपको न केवल दुनिया के लिए एक कलाकार के रूप में, बल्कि एक ऐसे बेहतरीन इंसान के रूप में देखा।''
उन्होंने लिखा, "लोग आपको एक अभिनेता या संस्था के तौर पर जानते हैं, लेकिन मैंने आपके उन पहलुओं को भी देखा है, जिन्हें कोई नहीं जानता। जिस तरह आप हर भूमिका के लिए उस समय पूरी खामोशी से तैयारी करते थे, जिस तरह आप हर किरदार में इस कदर घुल-मिल जाते थे कि कभी-कभी मैं भी नहीं जान पाती थी। आपका समर्पण हमेशा आपकी कला और आपके प्रशंसकों के लिए एक पवित्र उपहार रहा है। मुझे आज भी याद है, वो दिन जब आप कितनी आसानी से उन चीजों को दे देते थे, जिन्हें दूसरे लोग जीवन भर संजोकर रखते हैं। अपनी घड़ी, शॉल और कलम, एक बच्चे की तरह मासूमियत से दे देते थे।''
सायरा बानो ने आगे लिखा, ''कभी-कभी, हल्की फुसफुसाहट के साथ दिल में मैं खुद को यह कहते हुए पाती हूं, "खुदा से पूछूं... क्या हम यूसुफ हमेशा के लिए नहीं मिल सकते?"
दिलीप कुमार और सायरा बानो की प्रेम कहानी फिल्मों के सेट से ही शुरू हुई थी। हालांकि, सायरा बानो का परिवार उनकी शादी से नाराज था, क्योंकि दिलीप कुमार 44 साल के थे और सायरा सिर्फ 22 साल की थीं। दिलीप साहब की बहनें भी शुरुआत में सायरा बानो को परिवार में स्वीकार नहीं कर पाई थीं और जानबूझकर उन्हें परेशान करती थीं।
--आईएएनएस
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