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khaskhabar.com: शनिवार, 08 नवम्बर 2025 4:34 PM (IST)
हिंदू संस्कृति में विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं होता, बल्कि यह दो परिवारों और दो आत्माओं का पवित्र बंधन माना जाता है। इस बंधन को सफल और शुभ बनाने के लिए हमारे शास्त्रों में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनमें वास्तु शास्त्र का भी गहरा महत्व है। माना जाता है कि यदि शादी के दौरान घर की ऊर्जा संतुलित और सकारात्मक रखी जाए, तो दांपत्य जीवन में कभी कोई बाधा नहीं आती। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि शादी की तैयारियों के समय हल्दी, मेहंदी और पूजन सामग्री किस दिशा में रखनी चाहिए ताकि घर में सुख, समृद्धि और मंगल की ऊर्जा बनी रहे।
शादी के शुभ समय पर वास्तु का महत्व
देवउठनी एकादशी के बाद से ही शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाते हैं। इन दिनों घरों में रौनक और खुशी का माहौल छा जाता है। रिश्तेदारों का आना-जाना, सजावट, तैयारियां और रस्में—सब कुछ इतनी तेजी से होता है कि कई बार लोग वास्तु की छोटी-छोटी बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा करने से घर की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर पड़ सकती है, जिसका असर शादी के आयोजन पर भी पड़ता है।
इस दिशा में रखें हल्दी, मेहंदी और पूजन सामग्री
वास्तु शास्त्र के अनुसार, विवाह से जुड़ी सभी पूजन सामग्री जैसे हल्दी, मेहंदी, चावल, सुपारी, नारियल, मंगल कलश आदि को ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिशा देवताओं की दिशा कही जाती है और यहां रखी वस्तुएं घर में आध्यात्मिक ऊर्जा और सौभाग्य लाती हैं। इस दिशा में बैठकर तैयार की गई हल्दी या मेहंदी रस्में अत्यंत मंगलकारी मानी जाती हैं।
यदि विवाह के दौरान हवन, पूजा या गणपति स्थापना जैसे अनुष्ठान हो रहे हों, तो इनका स्थान भी इसी दिशा में रखना सबसे शुभ रहता है। यह दिशा घर के कोने में स्थित हो तो और भी बेहतर, क्योंकि वहां ऊर्जा का प्रवाह अवरोधित नहीं होता।
भूलकर भी न करें यह गलती
वास्तु के अनुसार, शादी की रस्मों से जुड़ी वस्तुएं कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं रखनी चाहिए। यह दिशा यम की दिशा मानी जाती है, जो निष्क्रिय और भारी ऊर्जा वाली होती है। यदि विवाह सामग्री, विशेष रूप से हल्दी या मेहंदी का थाल इस दिशा में रखा जाए, तो इससे शुभ कार्यों में बाधा या देरी की संभावना बढ़ जाती है।
कई बार लोग सुविधानुसार चीजें रख देते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार दक्षिण दिशा में रखे ऐसे सामान से घर में नेगेटिव एनर्जी का प्रभाव बढ़ सकता है। इसलिए हमेशा शादी की तैयारी के दौरान यह ध्यान रखें कि सामान सही दिशा में हो, ताकि पूरे आयोजन पर शुभता बनी रहे।
घर की ऊर्जा को सकारात्मक बनाने के सरल उपाय
शादी वाले घर में हर समय खुशियों की तरंग बनी रहे, इसके लिए वातावरण को सुगंधित और शुद्ध रखना आवश्यक है। इसके लिए घर में केसर, चंदन और गुलाब जैसी प्राकृतिक खुशबू का प्रयोग करना चाहिए। इससे घर का माहौल शांत और पवित्र रहता है।
मुख्य द्वार को आम की पत्तियों के तोरण से सजाना अत्यंत शुभ माना गया है। यह तोरण नकारात्मक ऊर्जा को प्रवेश करने से रोकता है और देवी लक्ष्मी के आगमन का संकेत भी देता है। इसके अलावा घर की दीवारों पर हल्के और चमकदार रंगों का प्रयोग करने से ऊर्जा संतुलित रहती है और विवाह के माहौल में सकारात्मकता बनी रहती है।
विवाह रस्मों से पहले करें यह एक उपाय
शादी से पहले यदि घर के ईशान कोण में गंगाजल का छिड़काव कर दिया जाए और वहां दीपक जलाया जाए, तो घर की ऊर्जा और भी शुद्ध हो जाती है। साथ ही विवाह में किसी भी प्रकार की अनहोनी या बाधा आने की संभावना समाप्त हो जाती है। यह छोटा-सा उपाय पूरे आयोजन में मंगल और सौभाग्य का वातावरण बनाए रखता है।
वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का विज्ञान नहीं है, बल्कि यह जीवन की ऊर्जाओं को संतुलित करने का साधन है। विवाह जैसे पवित्र अवसर पर यदि इन नियमों का पालन किया जाए, तो न केवल शादी सफल होती है बल्कि दांपत्य जीवन में भी स्थायी सुख-शांति बनी रहती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियां पारंपरिक मान्यताओं और सामान्य वास्तु सिद्धांतों पर आधारित हैं। इन्हें किसी अंतिम निर्णय के रूप में न लें। व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार किसी योग्य वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।
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शादी के शुभ अवसर पर हल्दी-मेहंदी और पूजन सामग्री रखें इस दिशा में, नहीं तो रुक सकती हैं रस्में

शादी के शुभ समय पर वास्तु का महत्व
देवउठनी एकादशी के बाद से ही शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाते हैं। इन दिनों घरों में रौनक और खुशी का माहौल छा जाता है। रिश्तेदारों का आना-जाना, सजावट, तैयारियां और रस्में—सब कुछ इतनी तेजी से होता है कि कई बार लोग वास्तु की छोटी-छोटी बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा करने से घर की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर पड़ सकती है, जिसका असर शादी के आयोजन पर भी पड़ता है।
इस दिशा में रखें हल्दी, मेहंदी और पूजन सामग्री
वास्तु शास्त्र के अनुसार, विवाह से जुड़ी सभी पूजन सामग्री जैसे हल्दी, मेहंदी, चावल, सुपारी, नारियल, मंगल कलश आदि को ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिशा देवताओं की दिशा कही जाती है और यहां रखी वस्तुएं घर में आध्यात्मिक ऊर्जा और सौभाग्य लाती हैं। इस दिशा में बैठकर तैयार की गई हल्दी या मेहंदी रस्में अत्यंत मंगलकारी मानी जाती हैं।
यदि विवाह के दौरान हवन, पूजा या गणपति स्थापना जैसे अनुष्ठान हो रहे हों, तो इनका स्थान भी इसी दिशा में रखना सबसे शुभ रहता है। यह दिशा घर के कोने में स्थित हो तो और भी बेहतर, क्योंकि वहां ऊर्जा का प्रवाह अवरोधित नहीं होता।
भूलकर भी न करें यह गलती
वास्तु के अनुसार, शादी की रस्मों से जुड़ी वस्तुएं कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं रखनी चाहिए। यह दिशा यम की दिशा मानी जाती है, जो निष्क्रिय और भारी ऊर्जा वाली होती है। यदि विवाह सामग्री, विशेष रूप से हल्दी या मेहंदी का थाल इस दिशा में रखा जाए, तो इससे शुभ कार्यों में बाधा या देरी की संभावना बढ़ जाती है।
कई बार लोग सुविधानुसार चीजें रख देते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार दक्षिण दिशा में रखे ऐसे सामान से घर में नेगेटिव एनर्जी का प्रभाव बढ़ सकता है। इसलिए हमेशा शादी की तैयारी के दौरान यह ध्यान रखें कि सामान सही दिशा में हो, ताकि पूरे आयोजन पर शुभता बनी रहे।
घर की ऊर्जा को सकारात्मक बनाने के सरल उपाय
शादी वाले घर में हर समय खुशियों की तरंग बनी रहे, इसके लिए वातावरण को सुगंधित और शुद्ध रखना आवश्यक है। इसके लिए घर में केसर, चंदन और गुलाब जैसी प्राकृतिक खुशबू का प्रयोग करना चाहिए। इससे घर का माहौल शांत और पवित्र रहता है।
मुख्य द्वार को आम की पत्तियों के तोरण से सजाना अत्यंत शुभ माना गया है। यह तोरण नकारात्मक ऊर्जा को प्रवेश करने से रोकता है और देवी लक्ष्मी के आगमन का संकेत भी देता है। इसके अलावा घर की दीवारों पर हल्के और चमकदार रंगों का प्रयोग करने से ऊर्जा संतुलित रहती है और विवाह के माहौल में सकारात्मकता बनी रहती है।
विवाह रस्मों से पहले करें यह एक उपाय
शादी से पहले यदि घर के ईशान कोण में गंगाजल का छिड़काव कर दिया जाए और वहां दीपक जलाया जाए, तो घर की ऊर्जा और भी शुद्ध हो जाती है। साथ ही विवाह में किसी भी प्रकार की अनहोनी या बाधा आने की संभावना समाप्त हो जाती है। यह छोटा-सा उपाय पूरे आयोजन में मंगल और सौभाग्य का वातावरण बनाए रखता है।
वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का विज्ञान नहीं है, बल्कि यह जीवन की ऊर्जाओं को संतुलित करने का साधन है। विवाह जैसे पवित्र अवसर पर यदि इन नियमों का पालन किया जाए, तो न केवल शादी सफल होती है बल्कि दांपत्य जीवन में भी स्थायी सुख-शांति बनी रहती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियां पारंपरिक मान्यताओं और सामान्य वास्तु सिद्धांतों पर आधारित हैं। इन्हें किसी अंतिम निर्णय के रूप में न लें। व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार किसी योग्य वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।
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