Advertisement
दक्षिण भारत में कुछ ऐसे मनाई जाती है गणेश चतुर्थी, मां-बेटे के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है ये पर्व

उत्तर भारत में इस त्योहार को हरतालिका के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन आमतौर पर विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है, जो नई पारंपरिक साड़ियां या वस्त्र पहनकर देवी की पूजा करती हैं। इस दिन महिलाएं हल्दी से बनी देवी गौरी की मूर्ति 'अरिशिनादगौरी' बनाती हैं। मूर्ति को आम के फूलों और पत्तियों से भी सजाया जाता है।
गणेश चतुर्थी में दक्षिण भारत के घरों और मंदिरों में इको-फ्रेंडली (मिट्टी की) गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। वेदों और पारंपरिक मंत्रोच्चार के साथ प्राण-प्रतिष्ठा और षोडशोपचार पूजा की जाती है। भगवान गणेश को प्रिय मोदक के अलावा दक्षिण भारत में विशेष पकवान बनाए जाते हैं। तमिलनाडु में चावल के आटे और नारियल-गुड़ से बने कोझुकट्टई का विशेष महत्व है। इसके अलावा पप्पडम, मोदक, वड़ा और पायसम का भोग लगाया जाता है।
बड़े पैमाने पर सार्वजनिक पंडालों का चलन महाराष्ट्र जैसा ही अब हर जगह है, लेकिन दक्षिण भारत में कई जगहों पर पारिवारिक रूप से एक, तीन या पांच दिनों तक पूजा के बाद स्थानीय जल स्रोतों (नदियों या समुद्र) में गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। तमिलनाडु और केरल के प्रसिद्ध विनायक मंदिरों में इस दौरान विशेष वाहन सेवाएं और उत्सव आयोजित होते हैं।
--आईएएनएस
ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे
Advertisement
यह भी प�?े
जीवन मंत्र
Advertisement
Traffic
Features


