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पौड़ी गढ़वाल के सांगुड़ा में बसा है मां भुवनेश्वरी का सिद्धपीठ, जानिए मंदिर का इतिहास

यह सिद्धपीठ पौड़ी जिले के बिलखेत क्षेत्र के सांगुड़ा गांव में नारद गंगा की पावन गोद में बसी हुई है। यह सतपुली-देवप्रयाग मार्ग के मध्य स्थित है। मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि आक्रमणकारियों द्वारा पूजा स्थलों को अपवित्र किए जाने पर मां भुवनेश्वरी ने मातृंग पिंडी का रूप धारण किया था।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में जब लोग व्यापार के लिए पैदल नजीबाबाद और अन्य मंडियों से नमक व गुड़ लाते थे, तब सैनार गांव के नेगी बंधु (मोथा नेगी व उनके भाई) नजीबाबाद गए थे। वहीं नमक की बोरी में मां भुवनेश्वरी पिंडी (मातृलिंग) रूप में प्रकट हुईं।
नेगी बंधुओं और नैथाणा गांव के श्री नेत्रमणि नैथानी के स्वप्न में आकर माता रानी ने दर्शन दिए और उनसे अपनी पिंडी को सांगुड़ा में स्थापित करने का आदेश दिया। इसके बाद विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ 21 मार्च 1757 को सांगुड़ा में मां की पिंडी की स्थापना की गई।
सांगुड़ा गांव को मां का मायका (नेगी वंश का क्षेत्र) माना जाता है। जिस भूमि पर मंदिर स्थापित है, वह पहले माणियारी रावत का तोक (क्षेत्र) था, जिसे मां की ससुराल कहा जाता है। सैलवाल जाति के ब्राह्मणों को यहां पूजा-अर्चना का दायित्व मिला, जो आज भी वंश परंपरा के अनुसार जारी है।
--आईएएनएस
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