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मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी के विविध रंग: द्वारकाधीश मंदिर में निकलती है झांकियां तो बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती

वहीं, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की जन्माष्टमी की सबसे खास परंपराओं में से एक यहां की मंगला आरती है। इस मंदिर में आम दिनों में मंगला आरती नहीं होती और जन्माष्टमी के मौके पर ही साल में एक बार यह खास आरती की जाती है। इस आरती को देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्त रात में ही मंदिर पहुंचते हैं।
बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। कृष्ण जन्म के बाद अभिषेक और आरती की जाती है और अगले दिन नंदोत्सव होता है। नंदोत्सव में भक्त कान्हा के जन्म की खुशी मनाते हैं, गीत गाते हैं और मिठाई बांटते हैं। इस तरह यहां जन्माष्टमी का उत्सव जन्म से लेकर नंद के घर आई खुशी तक मनाया जाता है।
उधर, वृंदावन का इस्कॉन कृष्ण-बलराम मंदिर भी जन्माष्टमी के दौरान भक्तों से गुलजार रहता है। यहां कृष्ण भक्ति का माहौल भजन, कीर्तन और पूजा के साथ बनता है।
वहीं, प्रेम मंदिर भी जन्माष्टमी के दौरान वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का बड़ा केंद्र रहता है। यहां मंदिर की सजावट और रोशनी के बीच कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। जन्माष्टमी पर रात 9 बजे से रात 1 बजे तक भजन-कीर्तन, अभिषेक, भोग, आरती और झूले जैसे कार्यक्रम रखे जाते हैं।
--आईएएनएस
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