The 9th-century Mahasu Temple, situated on the banks of the Tons River, offers justice to every dispute.-m.khaskhabar.com
×
khaskhabar
Oct 13, 2026 6:44 am
Location
 
   राजस्थान और हरियाणा सरकार से विज्ञापनों के लिए मान्यता प्राप्त
Advertisement

टोंस नदी किनारे बसा 9वीं सदी का चमत्कारी महासू मंदिर, जहां मिलता है हर विवाद का न्याय

khaskhabar.com: गुरुवार, 10 सितम्बर 2026 11:03 AM (IST)
टोंस नदी किनारे बसा 9वीं सदी का चमत्कारी महासू मंदिर, जहां मिलता है हर विवाद का न्याय
उत्तराखंड । उत्तराखंड की गोद में बसा हनोल गांव प्रसिद्ध महासू मंदिर की आस्था और रहस्य का केंद्र बना हुआ है। इस क्षेत्र में महासू देवता को 'न्याय का देवता' माना जाता है। स्थानीय लोग अपने विवादों के समाधान और न्याय के लिए यहां आते हैं। यह मंदिर जौनसार-बावर क्षेत्र के हनोल में स्थित है, जो देहरादून से लगभग 173 किलोमीटर दूर है। इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी अनोखी काष्ठ-कला है, जो काठ-कुणी शैली में बनी हुई है। लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी को देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि हमारी प्राचीन संस्कृति और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण भी है। गुरुवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर भी मंदिर की प्रशंसा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट कर लिखा, "देहरादून जिले के जौनसार-बावर आदिवासी इलाके के हनोल में मौजूद महासू देवता मंदिर, देवभूमि की समृद्ध लोक संस्कृति, पुरानी परंपराओं और गहरी आस्था का एक खास प्रतीक है। श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा से जुड़ा यह पवित्र स्थल, अपने अंदर आदिवासी इलाके की अनोखी सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए है। देहरादून जिले में आने पर, आपको भी इस पवित्र मंदिर में जरूर मत्था टेकना चाहिए।"
उत्तराखंड के देहरादून जिले में टोंस नदी के पूर्वी तट पर हनोल गांव में स्थित प्रसिद्ध महासू देवता मंदिर भगवान शिव के एक रूप महासू देवता को समर्पित एक प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है। 9वीं-10वीं शताब्दी में बने इस मंदिर का निर्माण पारंपरिक काठ-कुणी (लकड़ी और पत्थर के संलयन) और हूण स्थापत्य शैली में किया गया है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
लोक कथाओं के अनुसार, इस क्षेत्र में किरमिक (या किर्मिर) नामक एक अत्याचारी राक्षस का आतंक था। एक स्थानीय ब्राह्मण हूणा भाट ने अपने परिवार और क्षेत्र को बचाने के लिए भगवान शिव व शक्ति की तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव के अंशावतार के रूप में चार भाई प्रकट हुए- बोठा महासू, बासिक (वासिक), पावसी (पसिक) और चालदा महासू। इन चारों भाइयों ने मिलकर राक्षस किरमिक का वध किया और इस क्षेत्र को आतंक से मुक्त कराया।
--आईएएनएस

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

Advertisement
Khaskhabar.com Facebook Page:
Advertisement