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श्री वराह लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर: दो स्वरूपों में विराजमान हैं भगवान विष्णु, जानें क्यों साल भर लगा रहता है चंदन का लेप?

भगवान विष्णु के इन दोनों ही रूपों की अलग-अलग पौराणिक कथा मौजूद हैं। भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिम्हा का अवतार लेकर राक्षस हिरण्यकशिपु का वध किया था, जबकि वराह अवतार लेकर भगवान विष्णु ने राक्षस हिरण्याक्ष को मारा था और मां पृथ्वी को बचाया था। मंदिर के निर्माण को लेकर कई तरह की बातें की जाती हैं।
माना जाता है कि 11वीं सदी में राजा श्री कृष्णदेवराय ने मंदिर का निर्माण करवाया था, लेकिन मंदिर के इतिहास में 13वीं सदी में पूर्वी गंग वंश के नरसिंह प्रथम का योगदान भी देखने को मिलता है। मंदिर की नक्काशी और गोपुरम दोनों सदी की शैली को दिखाते हैं। बढ़ते समय के साथ मंदिर अलग-अलग राज्यों के संरक्षण में रहा और धीरे-धीरे मंदिर का निर्माण बढ़ता गया।
मंदिर में जयस्तंभ भी स्थापित है, जिसे कलिंग के राजा कृष्णदेवराय ने युद्ध के दौरान बनवाया था। मंदिर आध्यात्मिकता के साथ-साथ सांस्कृतिक शैली और अलग-अलग युगों के संरक्षण का प्रमाण देता है। यह मंदिर पर्यटन की दृष्टि से भी खास है। भक्त भगवान के अद्भुत दो रूपों को देखने के लिए आते हैं। -आईएएनएस
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