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शीतला माता की उपासना का पर्व ‘थदड़ी’: सिंधी समाज ने घरों में नहीं जलाया चूल्हा, ठंडे व्यंजनों का लगाया भोग

इस अवसर पर सिंधी समाज के पारंपरिक व्यंजन खोरक, चोपा, मीठी मानी, टिक्की, खीरोणी और पकोड़ी विशेष रूप से तैयार किए जाते हैं। इन पारंपरिक पकवानों से घरों में पर्व का अलग ही उत्साह देखने को मिलता है।
शांति, संयम और आरोग्य का संदेश देता है पर्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार थदड़ी केवल ठंडे भोजन का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में शांति, संयम और सकारात्मकता अपनाने का संदेश भी देता है। इस दिन श्रद्धालु क्रोध, घमंड, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों को त्यागकर प्रेम, सद्भाव और पारिवारिक एकता बनाए रखने का संकल्प लेते हैं।
मान्यताओं के अनुसार इस पर्व का संबंध आरोग्य, स्वच्छता और संक्रामक रोगों से बचाव की परंपराओं से भी जोड़ा जाता है। शीतला माता की उपासना के माध्यम से परिवार के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना की जाती है। थदड़ी का पर्व सिंधी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक आस्थाओं को आज भी जीवंत बनाए हुए है।
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