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कहलगांव में गूंजा श्रीमद्भागवत कथा का मंगल उद्घोष, प्रथम दिवस पर उमड़ा श्रद्धा और भक्ति का जनसैलाब

भागवत कथा को बताया कलियुग का महान आधार
प्रथम दिवस की कथा में पंडित बाल प्रभु जी महाराज ने मंगलाचरण के साथ श्रीमद्भागवत महात्म्य का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण का माध्यम है। कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और उसे धर्म, भक्ति तथा सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने अपने प्रवचन में बताया कि श्रीमद्भागवत का संदेश मानव जीवन को दिशा देने वाला है। कथा के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ सकता है और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हो सकता है। महाराज ने श्रद्धालुओं को नियमित रूप से सत्संग और कथा श्रवण से जुड़ने का भी संदेश दिया।
भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ पूरा परिसर
कथा के दौरान भजन-कीर्तन की मनमोहक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भक्तजन भगवान के जयघोष और भक्ति गीतों में पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हुए। कथा स्थल पर ऐसा वातावरण बना कि हर ओर केवल भक्ति और आस्था का ही स्वर सुनाई दे रहा था। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित सभी आयु वर्ग के लोगों ने कथा का रसपान किया।
प्रसाद वितरण में उमड़ी श्रद्धा
कथा के समापन के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर धार्मिक आयोजन का पुण्य लाभ प्राप्त किया। आयोजन के दौरान सेवा कार्यों में लगे स्वयंसेवकों की भूमिका भी सराहनीय रही, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
दूर-दराज के श्रद्धालुओं ने भी लिया कथा का लाभ
जो श्रद्धालु कथा स्थल तक नहीं पहुंच सके, उन्होंने इंटरनेट माध्यम से कथा का सीधा प्रसारण देखकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। इससे विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले भक्त भी इस धार्मिक आयोजन से जुड़े रहे और कथा के संदेश को सुन सके।
15 जून तक चलेगी कथा
आयोजन समिति के अनुसार श्रीमद्भागवत कथा का यह धार्मिक आयोजन 15 जून तक प्रतिदिन दोपहर तीन बजे से सायंकाल सात बजे तक आयोजित किया जाएगा। आगामी दिनों में कथा के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा, जिनका श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। समिति ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की है।
कहलगांव में प्रारंभ हुई यह श्रीमद्भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनी हुई है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
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