Shani Pradosh: Day of worship of Shiva, Gauri and Surya son, note down Rahukaal-m.khaskhabar.com
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शनि प्रदोष : शिव गौरी और सूर्य पुत्र की उपासना का दिन, नोट कर लें राहुकाल

khaskhabar.com: शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026 08:59 AM (IST)
शनि प्रदोष : शिव गौरी और सूर्य पुत्र की उपासना का दिन, नोट कर लें राहुकाल
नई दिल्ली। सनातन धर्म में शनि प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत हर माह की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है, लेकिन जब यह तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तो इसे शनि प्रदोष कहा जाता है। 14 फरवरी को शनिवार है और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। शनिवार को द्वादशी तिथि शाम 4 बजकर 1 मिनट तक, फिर त्रयोदशी लग जाएगी। यह शनि प्रदोष व्रत का पावन अवसर है। यह व्रत भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ संयोग प्रदान करता है। प्रदोष व्रत मूल रूप से भगवान शिव को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के दुख दूर होते हैं। शनिवार को पड़ने पर इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि शनिदेव भगवान शिव के परम भक्त माने जाते हैं। शिव की आराधना से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और उनका प्रकोप नहीं होता।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जिनकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या अन्य अशुभ प्रभाव चल रहे हैं। शनि प्रदोष व्रत रखने से शनि दोष, आर्थिक तंगी, देरी, मुकदमेबाजी, मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। यह व्रत संतान प्राप्ति, पति की लंबी आयु, आरोग्य और जीवन में स्थिरता-समृद्धि प्रदान करता है।
इस बार यह व्रत महाशिवरात्रि से ठीक पहले आ रहा है, जो इसे और भी खास बनाता है। महादेव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजन करना लाभदायी होता है। प्रदोष काल में शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद, जल आदि से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल के साथ माता को इत्र और शृंगार का सामान चढ़ाएं।
दृक पंचांग के अनुसार, 14 फरवरी, शनिवार को नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा शाम 6 बजकर 16 मिनट तक, फिर उत्तराषाढ़ा रहेगा। योग सिद्धि है, जो 15 फरवरी की सुबह 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। चंद्रमा धनु राशि में संचार करेंगे। सूर्योदय 7 बजे और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 10 मिनट पर होगा।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 18 मिनट से 6 बजकर 9 मिनट तक रहेगा, अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक, अमृत काल 1 बजकर 3 मिनट से 2 बजकर 47 मिनट तक और विजय मुहूर्त 2 बजकर 27 मिनट से 3 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 12 मिनट तक है। यमगंड 1 बजकर 59 मिनट से 3 बजकर 23 मिनट तक और गुलिक 7 बजे से 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।

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