Advertisement
रक्षाबंधन 2025: शुभ मुहूर्त, दिशा और वास्तु नियमों के साथ मनाएं भाई-बहन के रिश्ते का सबसे पावन पर्व

थाल सजाने के वास्तु नियम
राखी थाल की सजावट भी ऊर्जा को प्रभावित करती है। एक स्वच्छ और सुंदर थाल में राखी के साथ रोली या चंदन, अक्षत (चावल), घी का दीपक, फूल और मिठाई अवश्य रखें। थाल के नीचे लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं क्योंकि ये रंग शुभता और समृद्धि के प्रतीक होते हैं। जब दीपक जलाएं तो उसे उत्तर या पूर्व दिशा में रखें, ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे।
राखी बांधने की विधि (वास्तु के अनुसार)
वास्तु शास्त्र के अनुसार, भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधनी चाहिए क्योंकि यह कर्तव्य और धर्म का प्रतीक मानी जाती है। राखी बांधते समय उसमें तीन गांठें अवश्य लगानी चाहिए – पहली गांठ रक्षा, दूसरी विश्वास, और तीसरी आत्मिक जुड़ाव का प्रतिनिधित्व करती है। इन गांठों से राखी एक साधारण धागे से बढ़कर एक आध्यात्मिक बंधन बन जाती है।
राखी बांधते समय मंत्र का उच्चारण
राखी बांधते समय इस वैदिक मंत्र का उच्चारण अत्यंत शुभ माना जाता है:
"येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् प्रतिबध्नामि, रक्षे मा चल मा चलः॥"
इस मंत्र के उच्चारण से भाई की सुरक्षा और जीवन में स्थिरता की कामना की जाती है, जिससे रक्षाबंधन का भाव और भी गहरा और प्रभावशाली बन जाता है।
आरती और मिठाई
राखी बांधने के पश्चात भाई की आरती उतारना एक पुरातन परंपरा है जो प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। इसके बाद भाई को मिठाई खिलाकर इस पावन क्रिया का समापन करें। यह प्रक्रिया केवल रस्म नहीं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव है। भाई द्वारा बहन को दिया गया उपहार उसके स्नेह और कृतज्ञता का प्रतीक होता है।
वास्तु नियमों से प्राप्त लाभ
जब रक्षाबंधन जैसे भावनात्मक पर्व को वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के साथ मनाया जाता है, तो यह केवल एक परंपरा न रहकर एक ऊर्जा-संपन्न प्रक्रिया बन जाती है। शुभ दिशा, उचित मुहूर्त, पवित्र थाल सजावट, गांठों का महत्व और मंत्र जाप न केवल भाई-बहन के रिश्ते को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सुख-समृद्धि का संचार भी करते हैं।
ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे
Advertisement
यह भी प�?े
जीवन मंत्र
Advertisement
Traffic
Features


