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रक्षाबंधन 2025: शुभ मुहूर्त, दिशा और वास्तु नियमों के साथ मनाएं भाई-बहन के रिश्ते का सबसे पावन पर्व

khaskhabar.com: शुक्रवार, 08 अगस्त 2025 4:05 PM (IST)
रक्षाबंधन 2025: शुभ मुहूर्त, दिशा और वास्तु नियमों के साथ मनाएं भाई-बहन के रिश्ते का सबसे पावन पर्व
रक्षाबंधन का पर्व इस वर्ष शनिवार, 9 अगस्त 2025 को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम और आपसी विश्वास को मजबूत करने का एक पावन अवसर होता है। इस बार रक्षाबंधन पर विशेष संयोग बन रहा है, क्योंकि पंचांग के अनुसार इस दिन भद्राकाल नहीं रहेगा, यानी पूरे दिन राखी बांधना शुभ और फलदायी माना गया है। प्रातः 7:35 से 9:15 तक, दोपहर 12:32 से शाम 5:26 तक, और विशेष रूप से अभिजित मुहूर्त में दोपहर 12:08 से 12:56 तक राखी बांधना अत्यंत शुभ रहेगा। इन मुहूर्तों में बहन द्वारा राखी बांधने से संबंधों में स्थायित्व, प्रेम और समृद्धि का संचार होता है। दिशा का महत्व राखी बांधते समय वास्तु के अनुसार दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भाई को उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) की ओर मुख करके बैठाना श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि यह दिशा पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होती है। बहन को इस स्थिति में दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुख करना चाहिए। अगर संभव हो तो राखी बाँधने की प्रक्रिया घर के पूजा स्थान में करना और भी फलदायी होता है।

थाल सजाने के वास्तु नियम

राखी थाल की सजावट भी ऊर्जा को प्रभावित करती है। एक स्वच्छ और सुंदर थाल में राखी के साथ रोली या चंदन, अक्षत (चावल), घी का दीपक, फूल और मिठाई अवश्य रखें। थाल के नीचे लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं क्योंकि ये रंग शुभता और समृद्धि के प्रतीक होते हैं। जब दीपक जलाएं तो उसे उत्तर या पूर्व दिशा में रखें, ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे।
राखी बांधने की विधि (वास्तु के अनुसार)
वास्तु शास्त्र के अनुसार, भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधनी चाहिए क्योंकि यह कर्तव्य और धर्म का प्रतीक मानी जाती है। राखी बांधते समय उसमें तीन गांठें अवश्य लगानी चाहिए – पहली गांठ रक्षा, दूसरी विश्वास, और तीसरी आत्मिक जुड़ाव का प्रतिनिधित्व करती है। इन गांठों से राखी एक साधारण धागे से बढ़कर एक आध्यात्मिक बंधन बन जाती है।

राखी बांधते समय मंत्र का उच्चारण

राखी बांधते समय इस वैदिक मंत्र का उच्चारण अत्यंत शुभ माना जाता है:

"येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् प्रतिबध्नामि, रक्षे मा चल मा चलः॥"

इस मंत्र के उच्चारण से भाई की सुरक्षा और जीवन में स्थिरता की कामना की जाती है, जिससे रक्षाबंधन का भाव और भी गहरा और प्रभावशाली बन जाता है।
आरती और मिठाई
राखी बांधने के पश्चात भाई की आरती उतारना एक पुरातन परंपरा है जो प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। इसके बाद भाई को मिठाई खिलाकर इस पावन क्रिया का समापन करें। यह प्रक्रिया केवल रस्म नहीं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव है। भाई द्वारा बहन को दिया गया उपहार उसके स्नेह और कृतज्ञता का प्रतीक होता है।
वास्तु नियमों से प्राप्त लाभ
जब रक्षाबंधन जैसे भावनात्मक पर्व को वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के साथ मनाया जाता है, तो यह केवल एक परंपरा न रहकर एक ऊर्जा-संपन्न प्रक्रिया बन जाती है। शुभ दिशा, उचित मुहूर्त, पवित्र थाल सजावट, गांठों का महत्व और मंत्र जाप न केवल भाई-बहन के रिश्ते को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सुख-समृद्धि का संचार भी करते हैं।

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