Raigarh Resonates With Krishna Naam Sankirtan As Radha Kishori Ji’s Spiritual Discourse Leaves Devotees Enraptured-m.khaskhabar.com
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रायगढ़ में गूंजा श्रीकृष्ण नाम संकीर्तन, राधा किशोरी जी की कथा में भावविभोर हुए श्रद्धालु

khaskhabar.com: सोमवार, 31 अगस्त 2026 09:26 AM (IST)
रायगढ़ में गूंजा श्रीकृष्ण नाम संकीर्तन, राधा किशोरी जी की कथा में भावविभोर हुए श्रद्धालु
रायगढ़ में भक्ति और अध्यात्म की अनुपम छटा उस समय देखने को मिली, जब अंतरराष्ट्रीय कथा व्यास एवं अध्यात्म कथा प्रवक्ता परम पूज्य दीदी श्री राधा किशोरी जी के सान्निध्य में तीन दिवसीय ‘भक्ति ज्ञान गंगा’, ‘नानी बाई रो मायरो’ एवं जन्माष्टमी महोत्सव का शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे और व्यासपीठ से प्रवाहित भक्ति रस में सराबोर हो गए। आयोजन के दौरान श्रीराधा-कृष्ण के नाम संकीर्तन और भक्तिमय भजनों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
व्यासपीठ पूजन के साथ हुआ कथा का शुभारंभ

कथा के प्रथम दिन मुख्य यजमान सहित उपस्थित श्रद्धालुओं ने विधिवत व्यासपीठ पूजन किया और परम पूज्य दीदी श्री राधा किशोरी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद व्यासपीठ पर विराजित ‘भक्तमाल पुराण’ ग्रंथ की पूजा, आरती और अर्चना की गई। धार्मिक परंपराओं के अनुसार विधिवत पूजन के बाद कथा का शुभारंभ हुआ। इस दौरान कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बने।
कथा के प्रारंभ में दीदी श्री राधा किशोरी जी ने शास्त्रोक्त विधि के साथ मंत्रोच्चार कराया और श्रद्धालुओं को भगवान के नाम का संकीर्तन कराया। जैसे-जैसे श्रीकृष्ण नाम का संकीर्तन आगे बढ़ा, कथा स्थल का वातावरण भक्तिमय होता गया। ‘सांवरिया है सेठ, म्हारी राधा जी सेठानी है’ जैसे भावपूर्ण भजनों ने श्रद्धालुओं के मन को छू लिया। भक्तों ने भक्ति के इस भाव में स्वयं को पूरी तरह डुबो दिया।
सांवरिया सेठ को बताया सच्चा सेठ
कथा के दौरान दीदी श्री राधा किशोरी जी ने भगवान सांवरिया सेठ और बरसाने वाली श्री राधा रानी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि इस संसार में वास्तविक अर्थों में भगवान सांवरा सेठ ही सच्चे सेठ हैं। बाकी सभी उनके भक्त और सेवक हैं। उन्होंने भगवान के प्रति समर्पण और भक्ति को जीवन का सबसे बड़ा आधार बताते हुए श्रद्धालुओं को नाम संकीर्तन से जुड़ने का संदेश दिया।
कथा में भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा के प्रति श्रद्धा, प्रेम और समर्पण का भाव लगातार दिखाई दिया। भजनों और कथा प्रसंगों के माध्यम से दीदी श्री राधा किशोरी जी ने श्रद्धालुओं को यह समझाने का प्रयास किया कि सच्ची भक्ति में अहंकार के लिए कोई स्थान नहीं होता। भगवान के प्रति पूर्ण विश्वास और समर्पण ही भक्त के जीवन को सार्थक बनाता है।
नरसी जी के जन्म और जीवन का भावपूर्ण प्रसंग
कथा के दौरान दीदी श्री राधा किशोरी जी ने भक्त नरसी जी के जीवन से जुड़े प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि नरसी जी जन्म से ही बोल और सुन नहीं पाते थे। बचपन में ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया। इसके बाद उनकी दादी ने उनका पालन-पोषण किया, जबकि परिवार के अन्य सदस्य भी उनकी देखभाल में सहयोग करते रहे।
कथा के अनुसार एक संत की कृपा से नरसी जी को वाणी प्राप्त हुई। उनकी वाणी खुलते ही उनके मुख से भगवान श्रीराधा-कृष्ण का नाम निकलने लगा। इसके बाद उनके जीवन में भक्ति की ऐसी धारा प्रवाहित हुई, जिसने उन्हें भगवान के अनन्य भक्त के रूप में स्थापित कर दिया।
समय के साथ नरसी जी ने शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की और गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया। उनके परिवार में नानी बाई नाम की पुत्री का जन्म हुआ। उनका एक पुत्र भी था। गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों के बीच भी उनकी भगवान के प्रति भक्ति और नाम संकीर्तन निरंतर जारी रहा।
भगवान शिव की कृपा से मिला श्रीकृष्ण की महारास लीला का दर्शन
दीदी श्री राधा किशोरी जी ने नरसी जी के जीवन का एक महत्वपूर्ण प्रसंग सुनाते हुए बताया कि बचपन में ही भगवान शिव की कृपा से नरसी जी को श्रीराधा-कृष्ण की महारास लीला के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दिव्य अनुभूति ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। भगवान के प्रति उनका अनुराग और गहरा होता गया तथा वे निरंतर प्रभु के नाम और गुणों का गान करने लगे।
कथा में बताया गया कि भगवान की विशेष प्रेरणा और आदेश के बाद नरसी जी अपने जन्मस्थान जूनागढ़ लौटे। वहां उन्होंने एक छोटी-सी झोपड़ी बनाकर रहना शुरू किया और अपना जीवन भगवान के नाम संकीर्तन तथा भक्ति को समर्पित कर दिया। परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं और परिवार के लोगों ने भी उन्हें वहां रहने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद वे एक सेठ द्वारा बनवाई गई धर्मशाला में रहने लगे।
धर्मशाला में रहते हुए नरसी जी ने दिन-रात भगवान का कीर्तन और गुणगान किया। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण प्रभु भक्ति में बीतने लगा। कथा के दौरान ‘कीर्तन की है रात, प्रभु आज थाने आना है’ जैसे भावपूर्ण भजनों के माध्यम से नरसी जी की अटूट भक्ति और भगवान के प्रति उनके समर्पण को प्रस्तुत किया गया।
नानी बाई के मायरे के प्रसंग ने बांधा श्रद्धालुओं को
कथा का सबसे भावुक और भक्तिमय पक्ष नानी बाई के मायरे से जुड़े प्रसंग के दौरान सामने आया। दीदी श्री राधा किशोरी जी ने नरसी जी और नानी बाई के जीवन से जुड़े प्रसंगों को इतने भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया कि कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
नानी बाई के मायरे की कथा के माध्यम से भगवान और भक्त के बीच के संबंध, विश्वास और समर्पण को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कथा आगे बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की भावनाएं और गहरी होती गईं। श्रीकृष्ण नाम संकीर्तन के बीच बड़ी संख्या में भक्त भजन गाते और झूमते नजर आए। पूरा वातावरण भक्तिरस में डूबा हुआ दिखाई दिया।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण के नाम का सामूहिक संकीर्तन किया। कई भक्त भजनों पर नृत्य करते हुए दिखाई दिए। कथा स्थल पर उमड़ा यह भक्तिभाव आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ा रहा था।
रायगढ़ में भक्ति की लहर से झूम उठा समाज
आयोजकों के अनुसार ऐसी अलौकिक और भावपूर्ण कथा सुनने का अवसर कभी-कभी ही मिलता है। कथा के प्रथम दिन ही रायगढ़ का प्रबुद्ध समाज और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन से जुड़ते दिखाई दिए। कथा के दौरान श्रद्धालुओं में जिस प्रकार का उत्साह और भक्ति भाव नजर आया, उससे पूरा वातावरण श्रीराधा-कृष्ण की भक्ति में रंगा हुआ दिखाई दिया।
इस तीन दिवसीय आयोजन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को धार्मिक कथाओं, भजनों और भगवान के नाम संकीर्तन के माध्यम से आध्यात्मिक आनंद से जोड़ना है। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से आगे भी कथा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म और भक्ति की इस ज्ञान गंगा में सहभागी बनने का आग्रह किया है।

अगले दिन दोपहर 3 बजे से होगी कथा

आयोजन के अगले दिन कथा का समय दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक निर्धारित किया गया है। आयोजक मुकेश केडिया, अनिल केडिया, शंकर केडिया, संजय रतेरिया, राजेश सिंघानिया, सतीश अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, राजेश केडिया, सुरेश अग्रवाल, कमल रतेरिया और प्रकाश निगानिया सहित आयोजन से जुड़े अन्य सदस्यों ने सभी श्रद्धालुओं का सादर आह्वान किया है कि वे परिवार सहित कथा स्थल पर पहुंचकर परम पूज्य दीदी श्री राधा किशोरी जी के मुखारविंद से नानी बाई के मायरे और श्रीकृष्ण भक्ति से जुड़े भावपूर्ण प्रसंगों का श्रवण करें।
तीन दिवसीय यह आयोजन रायगढ़ में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण को नई ऊंचाई दे रहा है। प्रथम दिन श्रीकृष्ण नाम संकीर्तन और नानी बाई के मायरे के प्रसंगों में जिस तरह श्रद्धालु भावविभोर हुए, उससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में भी कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

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