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परिवर्तिनी एकादशी 2025: जानें आज के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और भोग का महत्व

khaskhabar.com: बुधवार, 03 सितम्बर 2025 08:55 AM (IST)
परिवर्तिनी एकादशी 2025: जानें आज के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और भोग का महत्व
आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है और परिवर्तिनी एकादशी तो विशेष रूप से भगवान विष्णु की उपासना के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस बार यह तिथि आयुष्मान, रवि और सौभाग्य सिद्धि योग जैसे शुभ संयोगों के बीच पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। शुभ मुहूर्त आज सुबह से रात तक परिवर्तिनी एकादशी की पूजा करने के कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। लाभ व अमृत योग से लेकर विजय और गोधूलि मुहूर्त तक भक्तजन पूजा-अर्चना कर सकते हैं। विशेष रूप से सुबह 7 बजे से 10 बजे तक और शाम 5:37 से 7:08 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके अलावा रात का अमृत काल और गोधूलि वेला भी पूजा के लिए उत्तम है।
पूजा विधि
परिवर्तिनी एकादशी पर प्रातःकाल स्नान कर मंदिर की साफ-सफाई करनी चाहिए। भगवान विष्णु का जलाभिषेक करें और पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करना शुभ होता है। विष्णु भगवान को पीला चंदन, पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। दीप प्रज्वलित करें और यदि संभव हो तो व्रत का संकल्प लें। इसके बाद परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और ‘ॐ नमो नारायणाय’, ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ जैसे मंत्रों का जाप करें। पूजा के अंत में आरती कर भगवान को भोग अर्पित करें और क्षमा याचना करें।
भोग और प्रसाद
इस दिन भगवान विष्णु को सात्विक भोग अर्पित करना चाहिए। इसमें गुड़ और चने की दाल, खीर, फल, मेवा, पंचामृत, मिश्री और तुलसी पत्तों के साथ मिठाई चढ़ाना शुभ फल देता है।

पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में बलि नामक पराक्रमी असुरराज ने तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था। देवता भयभीत होकर भगवान विष्णु के पास गए। तब भगवान ने वामन अवतार लिया और बलि से भिक्षा में तीन पग भूमि मांगी। बलि ने वचन दिया, लेकिन वामन रूपी विष्णु ने एक पग में पृथ्वी और दूसरे पग में आकाश नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए जब स्थान नहीं बचा, तो बलि ने स्वयं अपना शीश प्रस्तुत कर दिया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर बलि को पाताल लोक का स्वामी बना दिया और कहा कि शेष देवता-सृष्टि की रक्षा वे स्वयं करेंगे।
कहा जाता है कि यह घटना परिवर्तिनी एकादशी के दिन ही हुई थी। इसलिए इस तिथि का विशेष महत्व माना जाता है।

उपाय

धन संबंधी परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए आज केले के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर अर्घ्य देने की परंपरा है। इसके साथ ही श्री विष्णु सहस्रनाम और विष्णु चालीसा का पाठ करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पंचांग के अनुसार महत्व
आज के पंचांग में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। चंद्रमा धनु राशि में है और सूर्य दक्षिणायन में। दिनभर आयुष्मान योग और बाद में सौभाग्य योग बन रहा है। राहुकाल दोपहर 1:04 से 2:35 बजे तक रहेगा। इसके अलावा विजय मुहूर्त दोपहर 3:05 से 3:54 बजे तक रहेगा।

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