Nestled between two mountains lies the miraculous abode of Baba Neem Karoli; a place of unwavering faith for millions of devotees.-m.khaskhabar.com
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दो पहाड़ों के बीच बसा है बाबा नीम करौली का चमत्कारी धाम, लाखों भक्तों की है अटूट आस्था

khaskhabar.com: मंगलवार, 01 सितम्बर 2026 12:57 PM (IST)
दो पहाड़ों के बीच बसा है बाबा नीम करौली का चमत्कारी धाम, लाखों भक्तों की है अटूट आस्था
नैनीताल । उत्तराखंड की हरी-भरी वादियों में बसा श्री कैंची धाम केवल एक तीर्थस्थल नहीं बल्कि, अनगिनत श्रद्धालुओं की आस्था, शांति और अटूट विश्वास का धार्मिक केंद्र बना हुआ है। नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा (महाराज जी) का एक पवित्र आध्यात्मिक आश्रम है। मान्यता है कि बाबा नीम करोली महाराज के दर से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता और इसी विश्वास के साथ देश-विदेश से लाखों भक्त इस पावन धरा पर शीश नवाते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता पर जोर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का खास वीडियो पोस्ट कर लिखा, "नैनीताल जिले में मौजूद कैंची धाम सबसे पूजनीय बाबा नीम करोली महाराज जी की कड़ी तपस्या की पवित्र जगह है और लाखों भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। पहाड़ों की शांत घाटियों में बसा यह दिव्य धाम आध्यात्मिक शांति और पॉजिटिव एनर्जी का एक अनोखा अनुभव देता है। नैनीताल आने पर, बाबा नीम करोली महाराज जी के इस पवित्र धाम के दर्शन जरूर करें।"
नैनीताल जिले के भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित यह पावन धाम 20वीं सदी के महान संत श्री नीम करोली बाबा की दिव्य कर्मस्थली और साधना भूमि है। यहां की अलौकिक ऊर्जा और शांत वातावरण हर उस व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है, जो जीवन के कोलाहल से दूर आत्मिक शांति की तलाश में निकलता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि श्री कैंची धाम दो पहाड़ियों के बीच कैंची के आकार (घुमावदार मोड़ों) वाली घाटी में स्थित है, इसलिए इसे 'कैंची धाम' कहा जाता है। आश्रम की स्थापना 1960 के दशक (वर्ष 1964) में नीम करोली बाबा द्वारा की गई थी। 15 जून 1964 को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कैंची धाम आश्रम का आधिकारिक उद्घाटन किया गया था। यहां मुख्य रूप से हनुमान जी का मंदिर है।
कैंची धाम पहले एक घना जंगल हुआ करता था, जहां संत सोमवारी महाराज और प्रेमी बाबा साधना करते थे। बाबा नीम करोली ने यहां आकर आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की और स्थानीय निवासी पूर्णानंद की दान की गई भूमि पर आश्रम बनवाया।
--आईएएनएस

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