Advertisement
मौनी अमावस्या : ईश्वर और पितरों की आराधना, दान-पुण्य का विशेष दिन, मिलेगी पितृदोष से शांति

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक रहेगा, उसके बाद उत्तराषाढ़ा शुरू होगा। वहीं, हर्षण योग शाम 9 बजकर 11 मिनट तक और करण चतुष्पाद दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं, राहुकाल दोपहर 4 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई शुभ या नया कार्य न करें।
धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर साधना, पूजा और ध्यान करना विशेष फलदायी होता है। इस पावन तिथि पर देवता और पूर्वज धरती पर आते हैं। मौन व्रत रखकर किया गया स्नान, दान और पूजा पितरों को अत्यंत प्रसन्न करती है। इससे पितृदोष दूर होता है, पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति, समृद्धि बनी रहती है।
माघ मास की यह अमावस्या प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है, जहां लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। यह दिन आत्मिक शुद्धि, पाप मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का भी अवसर है। मौनी अमावस्या पर दान-पुण्य और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। इस दिन संभव हो सके तो नदी में स्नान करना चाहिए, यदि आपके घर के पास नदी नहीं है तो त्रिवेणी का ध्यान कर घर में स्नान करने से नदी में स्नान करने का फल मिलता है।
मौन रहकर ध्यान और ईश्वर की आराधना करें। पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करें और उन्हें काले तिल, कुश और जल से दक्षिण दिशा मुख करके अर्घ्य दें। पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का भी विशेष विधान है। मौनी अमावस्या पर मौन साधना, स्नान-दान और पितृ पूजा से जीवन में नकारात्मकता दूर होती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
धर्म शास्त्र कहते हैं कि इस दिन किया दान-पुण्य कई गुना फल देता है। अपनी सामर्थ्य अनुसार काले तिल, गुड़, घी, अन्न, चावल, आटा, गर्म कपड़े, पका हुआ भोजन, फल, धन दान करना चाहिए। गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराना भी पुण्य देता है। ये दान गुप्त रूप से करना उत्तम माना जाता है। भगवान विष्णु और शिव की पूजा भी करें।
ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे
Advertisement
यह भी प�?े
जीवन मंत्र
Advertisement
Traffic
Features


